दिल्ली–जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर मानेसर से बिलासपुर तक रोजाना लगने वाला भीषण जाम अब आम बात हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि सुबह से लेकर देर शाम तक हाईवे रेंगता नजर आता है। रोजाना हजारों वाहन चालक, ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, स्कूली वाहन और माल ढुलाई करने वाले ट्रक इस जाम में फंसकर घंटों बर्बाद कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

अवैध पार्किंग और निजी बसें बना रहीं जाम
हाईवे पर जगह-जगह अवैध पार्किंग, ढाबों के सामने खड़े भारी वाहन और निजी बसों द्वारा हाईवे पर ही सवारियां उतारना-चढ़ाना जाम की सबसे बड़ी वजह बन गया है। शाम होते ही मानेसर, बिनोला, बिलासपुर चौक और राठीवास चौक पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
इन जगहों पर फ्लाईओवर निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन निर्माण के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा यह है कि थोड़ी सी भी चूक पूरा हाईवे जाम कर देती है।
सोमवार और शुक्रवार को हालात सबसे बदतर
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोमवार सुबह करीब 10 बजे और शुक्रवार शाम 5 बजे के बाद तो हालात पूरी तरह बेकाबू हो जाते हैं। इस दौरान ऑफिस टाइम और वीकेंड ट्रैफिक के कारण हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार थम जाती है।
मानेसर क्षेत्र में पैदल यात्रियों का हाईवे पार करना और सड़कों के किनारे खड़े वाहन भी जाम को और बढ़ा देते हैं।
खराब वाहन और गलत दिशा बनी नई मुसीबत
हाईवे पर कहीं भी किसी वाहन के खराब हो जाने से कई किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है। जाम से बचने के चक्कर में कई वाहन चालक सर्विस लेन और गलत दिशा में वाहन घुसा देते हैं, जिससे गाड़ियां आमने-सामने फंस जाती हैं और स्थिति और भयावह हो जाती है।
वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था नहीं
गुरुग्राम से जयपुर की ओर जिले की सीमा में चार से पांच स्थानों पर रोजाना जाम लग रहा है। फ्लाईओवर निर्माण के दौरान प्रशासन द्वारा वैकल्पिक रास्तों की कोई प्रभावी योजना नहीं बनाई गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गुरुग्राम–पटौदी–रेवाड़ी रोड को पूरी तरह चालू कर दिया जाए, तो दिल्ली–जयपुर हाईवे का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है। हालांकि, इस रोड पर भी अधूरे निर्माण और जाम की समस्या बनी हुई है।
ग्रामीण सड़कों की हालत भी बदहाल
ग्रामीण इलाकों से निकलने वाली संपर्क सड़कों की हालत भी बेहद खराब है। खस्ताहाल सड़कों के कारण ग्रामीणों को भी रोजाना जाम से गुजरना पड़ रहा है और वैकल्पिक मार्गों का लाभ नहीं मिल पा रहा।
प्रशासन नेी आश्वासन तक सीमित
इस संबंध में मानेसर के एसडीएम दर्शन यादव का कहना है कि रोड सेफ्टी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और लोगों की समस्या के समाधान के प्रयास किए जाएंगे।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन सिर्फ बैठकों तक सीमित रहेगा या जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई भी होगी?
जब तक अवैध पार्किंग पर रोक, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था नहीं होती, तब तक दिल्ली–जयपुर हाईवे पर जाम से राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।
