दिल्ली से गुरुग्राम, रेवाड़ी होते हुए राजस्थान के नीमराना तक प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम NCRTC ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया शुरु करने की तैयारी कर ली है।

इस कॉरिडोर के लिए निजी जमीन सीधे जमीन मालिकों से सहमति के आधार पर खरीदी जाएगी। इसके लिए ड्राफ्ट नीति तैयार कर ली गई है, जिसे मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा।
381 एकड़ निजी और 501 एकड़ सरकारी जमीन की जरूरत
जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए हरियाणा में कुल 381 एकड़ निजी जमीन और 501 एकड़ सरकारी जमीन की आवश्यकता होगी। यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरु होकर गुरुग्राम और रेवाड़ी होते हुए नीमराना तक जाएगा।
इसके अलावा दिल्ली से पानीपत और करनाल तक के कॉरिडोर के लिए भी जमीन की जरूरत होगी।
मेट्रो मॉडल पर होगी जमीन खरीद
NCRTC ने साफ किया है कि पारंपरिक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाने से प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है। ऐसे में गुुरुग्राम मेट्रो की तर्ज पर जमीन मालिकों से आपसी सहमति से जमीन खरीदी जाएगी।
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड पहले ही इस मॉडल को अपनाकर जमीन खरीद नीति लागू कर चुका है, जिससे प्रक्रिया तेज और विवाद मुक्त बनी रहती है।
34 हजार करोड़ की मेगा परियोजना
दिल्ली गुरुग्राम बावल नीमराना नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई 105.20 किलोमीटर होगी, जिस पर करीब 34,299 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 16 स्टेशन बनाए जाने की प्रस्ताव है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने फिलहाल वपहले चरण में दिल्ली से गुरुग्राम होते हुए बावल तक 93.12 किलोमीटर लंबी लाइन को मंजूरी दी है, जिसमें 13 स्टेशन बनाए जाएंगे।
हरियाणा राजस्थान के बीच हुई अहम बैठक
इस परियोजना को राजस्थान तक विस्तार देने को लेकर 5 मार्च को हरियाणा और राजस्थान के मुख्य सचिवों के बीच बैठक हुई थी। वहींं 9 मार्च को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में भी समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
दिल्ली- NCR कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा
इस नमो भारत ट्रेन प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद दिल्ली, गुरुग्राम, रेवाड़ी और नीमराना के बीच कनेक्टिविटी बेहद तेज और आसान हो जाएगी। इससे न सिर्फ रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
