गुरुग्राम। व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कमी का असर अब स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने के चलते कोयले की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे इसके दामों में करीब 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।

शहर के बस स्टैंड, भीमनगर, चार और आठ मरला समेत कई इलाकों में कोयले के गोदाम सक्रिय हैं, जहां से होटल और ढाबा संचालक बड़ी मात्रा में कोयला खरीदकर ले जा रहे हैं। गैस की अनुपलब्धता के कारण अब व्यवसायी मजबूरन कोयले को विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
कोयला कारोबारी राकेश गर्ग के अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कोयले के उपयोग की अनुमति मिलने के बाद उद्योगों और ढाबों में फिर से भट्ठियां चलने लगी हैं। उन्होंने बताया कि गैस सिलेंडरों की कमी के चलते छोटे से लेकर बड़े व्यवसायों तक ने कोयले का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, ताकि उनका कारोबार प्रभावित न हो।
वर्तमान में लकड़ी का कोयला 40 रुपये प्रति किलो और पक्का कोयला 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। कीमतों में आई इस बढ़ोतरी के पीछे परिवहन लागत में वृद्धि को मुख्य कारण बताया जा रहा है। लकड़ी का कोयला राजस्थान से आता है, जबकि पक्का कोयला छत्तीसगढ़ से सप्लाई होता है। दोनों ही राज्यों से भाड़ा बढ़ने के कारण स्थानीय बाजार में कोयला महंगा हो गया है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले समय में कोयले की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
