गुरुग्राम। बड़े-बड़े दावों के साथ शुरू हुआ सेक्टर-63 का हेलीपैड प्रोजेक्ट अब फाइलों में अटक गया है। तीन साल पहले घोषणा हुई थी, लेकिन आज तक न जमीन मिली और न ही लेआउट प्लान को मंजूरी—नतीजा, काम शुरू ही नहीं हो पाया।

पहले 30 एकड़… अब घटकर 10 एकड़
शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के लिए 30 एकड़ जमीन देने की बात थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर करीब 10–12 एकड़ कर दिया गया। सेक्टर-63 में जमीन चिन्हित जरूर हुई, लेकिन अब तक ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
6 महीने से फाइल अटकी
हेलीपैड का लेआउट प्लान तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन 6 महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी मंजूरी नहीं मिली। इसी वजह से पूरा प्रोजेक्ट रुका पड़ा है।
क्या बनना था यहां?
इस हेलीपैड को गुरुग्राम के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा था।
- 200 करोड़ रुपये की लागत
- 100 यात्रियों के लिए टर्मिनल
- छोटे-बड़े हेलीकॉप्टर के लिए हैंगर
- 300 मीटर रनवे
- 6 लैंडिंग स्पॉट
- 24×7 ऑपरेशन और नाइट लैंडिंग
2025 का लक्ष्य भी फेल
योजना थी कि 2025 तक यहां से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो जाएगी, लेकिन मौजूदा हालात देखकर ये लक्ष्य अब पूरा होता नहीं दिख रहा।
जमीन ट्रांसफर पर भी ब्रेक
अधिकारियों के मुताबिक, जब तक लेआउट प्लान को मंजूरी नहीं मिलती, तब तक जमीन ट्रांसफर नहीं होगी। यानी प्रोजेक्ट आगे बढ़ने से पहले ही कई स्तरों पर अटक चुका है।
लोगों को इंतजार
गुरुग्राम में तेजी से बढ़ते ट्रैफिक के बीच यह हेलीपैड एक बड़ा विकल्प माना जा रहा था। लेकिन लगातार देरी से अब यह प्रोजेक्ट सिर्फ घोषणा बनकर रह गया है।
अब सवाल यही है—क्या यह प्रोजेक्ट कभी जमीन पर उतरेगा या फाइलों में ही घूमता रहेगा?
