देश की पहली विदेशी यूनिवर्सिटी शुरू, गुरुग्राम बना अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का नया हब

भारत की उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पल आया है। गुरुग्राम में देश की पहली विदेशी यूनिवर्सिटी — इंग्लैंड की साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी — ने अपने नए कैंपस के साथ औपचारिक रूप से संचालन शुरू कर दिया है। इसका उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संयुक्त रूप से किया।

क्या-क्या कोर्स होंगे उपलब्ध?
गुरुग्राम के सेक्टर 59 स्थित इस कैंपस में पहले साल जिन प्रमुख कोर्सों की पढ़ाई कराई जाएगी, उनमें शामिल हैं:

  • कंप्यूटर साइंस
  • इकोनॉमिक्स
  • अकाउंट एंड फाइनेंस
  • बिजनेस मैनेजमेंट
  • इंटरनेशनल मैनेजमेंट

नई शिक्षा नीति 2020 का असर
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर कहा,

“यह यूनिवर्सिटी भारत की नई शिक्षा नीति 2020 के पांच वर्षों की उपलब्धियों का प्रतीक है। यह कदम भारत-यूके रोडमैप 2030 को शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।”

उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक कैंपस की स्थापना सिर्फ एक वर्ष में की गई, जो भारत की नीतिगत प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता को दर्शाता है।

शिक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि वर्ष 2014 में जहां QS रैंकिंग में केवल 11 भारतीय यूनिवर्सिटी शामिल थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 54 हो गई है।

“यह बदलाव भारत की शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक स्तर पर बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।”

17 विदेशी यूनिवर्सिटी को मंजूरी
भारत सरकार ने अब तक 17 वैश्विक स्तर की यूनिवर्सिटी को भारत में अपने कैंपस खोलने की अनुमति दी है, जिनमें से 3 यूनिवर्सिटीज में शैक्षणिक सत्र आरंभ भी हो चुका है। ये यूनिवर्सिटीज एनसीआर और मेट्रो शहरों में खोली जाएंगी ताकि अधिक से अधिक युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री को मिला केंद्रीय मंत्री से श्रेय
धर्मेंद्र प्रधान ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की भी सराहना की और कहा,

“हरियाणा सरकार ने एक सकारात्मक और सहयोगी वातावरण प्रदान किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और शैक्षणिक संस्थानों को यहां आने में कोई हिचक नहीं रही।”






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