दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) द्वारा आठ साल पहले शुरू किया गया बिजली लाइनों को भूमिगत करने का ambitious प्रोजेक्ट अब तक अधूरा पड़ा है। टाटा कंपनी को 2017 में यह जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन आज तक पूरा काम नहीं हो पाया है। इसके चलते जगह-जगह अधूरे काम और लटकते तार हादसों को न्योता दे रहे हैं।

ताजा मामला डूंडाहेड़ा बार्डर का है, जहां सड़क के ऊपर से गुजर रही 11 केवीए लाइन का तार टूटकर नीचे गिर गया। उसी समय वहां एक सिटी बस खड़ी थी, जिसमें मैकेनिक काम कर रहा था। जैसे ही तार बस पर गिरा, बस में करंट दौड़ गया और टायरों में आग लग गई। गनीमत रही कि मैकेनिक ने बस से कूदकर अपनी जान बचा ली।
आठ साल पहले बनी योजना, आज भी अधूरी
बेहतर बिजली आपूर्ति और सुरक्षा के उद्देश्य से निगम ने 580 फीडरों को भूमिगत करने का निर्णय 2017 में लिया था। इस कार्य के लिए कुल 1135 करोड़ रुपये के टेंडर चार कंपनियों को दिए गए थे — जिनमें से दो टेंडर टाटा कंपनी को मिले। शेष दो टेंडर विद्या टैलीलिंक और एलएंडटी कंपनी को दिए गए थे।
विद्या टैलीलिंक और एलएंडटी ने अपना कार्य समय पर पूरा कर लिया, लेकिन टाटा कंपनी के दोनों प्रोजेक्ट अभी तक अधूरे हैं। जिस लाइन पर डूंडाहेड़ा में हादसा हुआ, वह भी टाटा कंपनी के जिम्मे भूमिगत की जानी थी।
| विवरण | संख्या |
| टेंडर की राशि | ₹239.52 करोड़ (29 सितंबर 2017) |
| कुल फीडर | 110 |
| औद्योगिक व शहरी फीडर | 83 |
| इंडिपेंडेंट फीडर | 27 |
| पूर्ण हुए कुल फीडर | 103 |
| शहरी व औद्योगिक पूरे हुए | 77 |
| इंडिपेंडेंट पूरे हुए | 26 |
अदालत में पहुंचा मामला
काम में देरी और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए बिजली निगम ने टाटा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद कंपनी जून 2024 में अदालत चली गई, जिससे प्रोजेक्ट और भी लंबित हो गया।
आरडब्ल्यूए ने जताई नाराज़गी
“स्मार्ट सिटी डिवीजन को इस लाइन को भूमिगत करने के लिए कई बार आग्रह किया गया, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं की गई। अगर बिजली निगम ने पहले ही आवश्यक कदम उठाए होते तो ऐसी घटना को टाला जा सकता था।”
— राजेश गेरा, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, सूर्याविहार सोसायटी
निगम का पक्ष
“संबंधित एसडीओ को तुरंत आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से इस पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है।”
— वीके अग्रवाल, मुख्य अभियंता, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
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