गुरुग्राम में एक चौंकाने वाला कॉर्पोरेट घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW-II) ने करीब 18.5 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में फरीदाबाद निवासी गौरव ढींगरा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने कंपनी के अंदर बैठे कर्मचारियों के साथ मिलकर 8 साल तक फर्जी वेंडर और नकली बिलों के जरिए करोड़ों रुपये निकाल लिए।
यह घोटाला 2015 से 2023 तक बिना किसी शोर-शराबे के चलता रहा।

कैसे खुला 8 साल पुराना राज?
मई 2025 में गुरुग्राम के खांडसा स्थित Kawasaki Robotics Private Limited के प्रतिनिधि ने सेक्टर-37 थाने में शिकायत दर्ज कराई। कंपनी रोबोटिक्स और ऑटोमेशन सेक्टर में काम करती है।
कंपनी को आंतरिक ऑडिट के दौरान संदिग्ध भुगतान का पता चला। इसके बाद मामला EOW-II को सौंपा गया।
फर्जी कंपनी बनाई, सिस्टम के अंदर से खेल खेला
जांच में सामने आया कि:
- “ढींगरा एंटरप्राइज” नाम से फर्जी फर्म बनाई गई
- तीन बैंक खाते खुलवाए गए
- कंपनी के कर्मचारी की मदद से वेंडर रजिस्ट्रेशन कराया गया
- फर्जी इनवॉइस लगाकर करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए
पुलिस के मुताबिक कुल 18,50,47,513 रुपये इन खातों में भेजे गए।
अंदरूनी कर्मचारी की मिलीभगत
पूछताछ में खुलासा हुआ कि कंपनी के कर्मचारी लविश ने वेंडर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कराई। सिस्टम के अंदर से क्लियरेंस मिलने के कारण भुगतान सीधे फर्जी खातों में जाता रहा।
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े घोटाले के बदले आरोपी को सिर्फ करीब 5 लाख रुपये मिले। बाकी रकम की जांच की जा रही है।
2 दिन की पुलिस रिमांड, और खुल सकते हैं बड़े नाम
गौरव ढींगरा को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
अब पुलिस:
- बैंक ट्रांजैक्शन की चेन खंगाल रही है
- संभावित अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है
- रकम की रिकवरी की कोशिश कर रही है
अधिकारियों का कहना है कि यह संगठित आर्थिक अपराध का मामला है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
सवाल जो उठ रहे हैं
- 8 साल तक कंपनी को भनक क्यों नहीं लगी?
- आंतरिक ऑडिट सिस्टम कहां फेल हुआ?
- क्या और कर्मचारी भी शामिल हैं?
गुरुग्राम के कॉर्पोरेट सेक्टर में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
