इलेक्ट्रिक बसें, पिंक बसें, मुफ्त सफर… आखिर सरकार की बड़ी योजना क्या है?

हरियाणा सरकार के वर्ष 2026-27 के बजट में परिवहन व्यवस्था को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई हैं। साइबर सिटी गुरुग्राम को इन फैसलों से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार ने साफ किया है कि सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए इन योजनाओं की घोषणा की।

इलेक्ट्रिक बसों का दायरा बढ़ेगा
फिलहाल प्रदेश के 12 शहरों में इलेक्ट्रिक सिटी बसें चल रही हैं, जिनमें गुरुग्राम भी शामिल है। अब इस सेवा को सभी जिला मुख्यालयों तक विस्तार देने की घोषणा की गई है।

साथ ही हरियाणा रोडवेज 50 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदेगा। ये बसें प्रमुख धार्मिक स्थलों — कटरा (वैष्णो देवी), सालासर, खाटूश्याम, हरिद्वार और अमृतसर — के लिए चलाई जाएंगी। इससे श्रद्धालुओं को सीधी और सुविधाजनक यात्रा मिलेगी।

महिलाओं और छात्राओं के लिए 500 पिंक बसें
प्रदेश में महिला यात्रियों और छात्राओं के लिए समर्पित बसों की संख्या 273 से बढ़ाकर 500 की जाएगी।

गुरुग्राम में अभी चार पिंक बसें चल रही हैं। नई घोषणा के बाद शहर के अलग-अलग रूटों पर इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है, जिससे कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित सफर मिलेगा।

छात्रों और परीक्षार्थियों को बड़ी सुविधा
प्रदेश स्तर पर 1000 नई बसें खरीदने की भी घोषणा की गई है।

इसके अलावा हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के परीक्षार्थियों के लिए मुफ्त यात्रा सुविधा शुरू की जाएगी। इसके लिए एक विशेष वेब पोर्टल बनाया जाएगा, जिससे छात्र सीधे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।

अभी तक परीक्षार्थियों को बस स्टैंड जाकर सीट बुक करनी पड़ती थी।

ट्रैफिक होगा हाई-टेक
प्रदेश में एक केंद्रीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा। इससे ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क सुरक्षा को तकनीकी रूप से मजबूत किया जाएगा।
गुरुग्राम जैसे ट्रैफिक प्रभावित शहर को इससे खास फायदा मिलने की उम्मीद है।

साथ ही, गुरुग्राम रोडवेज डिपो में ड्राइवरों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा।

लेकिन स्थायी बस स्टैंड पर फिर चुप्पी
बजट में जहां कई घोषणाएं हुईं, वहीं गुरुग्राम के स्थायी रोडवेज बस स्टैंड को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया।

पिछले लगभग दस वर्षों से यात्री अस्थायी बस स्टैंड से सफर करने को मजबूर हैं। जगह चिन्हित होने के बावजूद निर्माण को लेकर अंतिम फैसला अब तक लंबित है।

क्या बदलेगी तस्वीर?
सरकार की घोषणाएं कागज पर मजबूत दिखती हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि ये योजनाएं जमीन पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती हैं।

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