साइबर अपराधियों ने एक बार फिर कॉर्पोरेट सेक्टर को निशाना बनाते हुए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। गुरुग्राम की एक बिल्डर्स कंपनी के फर्जी मालिक बनकर ठगों ने कंपनी के अकाउंटेंट से भारी रकम ट्रांसफर करवा ली। इस मामले में साइबर थाना दक्षिण पुलिस ने रेवाड़ी जिले के दो युवकों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुरखपुर गांव निवासी अमित और गुड़ियानी गांव निवासी दीपांशु के रूप में हुई है। दोनों पर ठगी में इस्तेमाल बैंक खाते की खरीद-फरोख्त का आरोप है।
व्हाट्सएप पर बना लिया ‘फर्जी मालिक’
पुलिस के अनुसार, 27 मई 2025 को कंपनी के अकाउंटेंट ने साइबर थाना दक्षिण में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसके व्हाट्सएप पर कंपनी के मालिक की फोटो और नाम से मैसेज आया।
मैसेज में खुद को कंपनी का मालिक बताते हुए तुरंत भुगतान करने के निर्देश दिए गए। भरोसे में आकर अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से करोड़ों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में पुष्टि करने पर पता चला कि व्हाट्सएप प्रोफाइल पूरी तरह फर्जी थी।
बिहार से पहले पकड़े जा चुके हैं 8 आरोपी
इस हाई-प्रोफाइल ठगी मामले में पुलिस पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। जांच के दौरान पिछले वर्ष बिहार से आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे मिली जानकारी के आधार पर अब रेवाड़ी कनेक्शन सामने आया है।
5 हजार में बेचा खाता, 10 हजार में आगे किया सौदा
जांच में खुलासा हुआ है कि अमित ने अपना बैंक खाता 5 हजार रुपये में दीपांशु को बेचा था। इसके बाद दीपांशु ने वही खाता 10 हजार रुपये में किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया। इसी खाते के जरिए ठगी की रकम को ट्रांसफर और आगे घुमाया गया।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि रकम किन-किन खातों में भेजी गई।
लगातार बढ़ रहे हैं ‘इम्पर्सोनेशन फ्रॉड’ के मामले
गुरुग्राम में कंपनियों को निशाना बनाकर फर्जी बॉस या मालिक बनकर ठगी (इम्पर्सोनेशन फ्रॉड) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर पुलिस ने कंपनियों को सलाह दी है कि—
- बड़े ट्रांजेक्शन से पहले कॉल या वीडियो कॉल के जरिए पहचान की पुष्टि करें
- केवल व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर भुगतान न करें
- दो-स्तरीय ऑथराइजेशन सिस्टम लागू करें
पुलिस ने कहा कि बैंक खाते बेचने या किराये पर देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
