जमीन नहीं, काम नहीं… फिर भी करोड़ों का भुगतान! गुरुग्राम नगर निगम पर उठे सवाल

गुरुग्राम नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में पार्किंग समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित सदर बाजार स्थित पोस्ट ऑफिस के पास मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना पिछले छह साल से कागजों में ही अटकी हुई है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर पार्किंग बनाई जानी थी, वह आज तक नगर निगम को औपचारिक रूप से मिली ही नहीं, लेकिन ठेकेदार को मशीनरी मोबिलाइजेशन के नाम पर करीब 2.49 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया गया।

करीब 49.03 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। मौके पर निर्माण कार्य की एक भी ईंट नहीं लगी है, जिससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

पार्किंग समस्या के समाधान के लिए बनाई गई थी योजना
शहर के व्यस्त सदर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या को देखते हुए यह परियोजना तैयार की गई थी। योजना के तहत यहां तीन बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पांच मंजिल का आधुनिक पार्किंग ढांचा बनाया जाना प्रस्तावित था।
निर्माण पूरा होने के बाद यहां

  • 378 चार पहिया वाहनों
  • 144 दोपहिया वाहनों

की पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होनी थी, जिससे बाजार और आसपास के कार्यालयों में आने वाले लोगों को राहत मिल सके।

फरवरी 2020 में दिया गया था ठेका
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार इस परियोजना का ठेका 12 फरवरी 2020 को मैसर्स नानू राम गोयल एंड कंपनी को दिया गया था।

लेकिन ठेका मिलने के बाद भी परियोजना की शुरुआत नहीं हो सकी। जमीन से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी न होने के बावजूद जनवरी 2020 में ठेकेदार को करीब 2.49 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया।

जमीन ही नहीं थी, फिर कैसे दिया ठेका?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन पर पार्किंग बननी थी, वह अभी तक नगर निगम को औपचारिक रूप से हस्तांतरित नहीं हुई है। इसके बावजूद न केवल ठेका दिया गया, बल्कि ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया गया।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में देरी के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।

छह साल तक नहीं हुई कोई कार्रवाई
परियोजना को मंजूरी मिले और ठेका दिए जाने के बाद छह साल बीत चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। इसके बावजूद ठेकेदार से भुगतान की गई राशि की कोई रिकवरी नहीं की गई।

बताया जाता है कि वर्ष 2020 में तत्कालीन चीफ इंजीनियर एनडी वशिष्ठ के कार्यकाल के दौरान यह भुगतान किया गया था। अब वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

अब दोबारा होगा टेंडर
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार जमीन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इस परियोजना के लिए दोबारा टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है।

हालांकि इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब जमीन उपलब्ध ही नहीं थी तो ठेका क्यों दिया गया और बिना काम किए करोड़ों रुपये का भुगतान कैसे कर दिया गया।

परियोजना से जुड़े अहम तथ्य

  • 49.03 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित मल्टीलेवल पार्किंग
  • 12 फरवरी 2020 को दिया गया ठेका
  • 2.49 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया गया
  • 3 बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और 5 मंजिल का प्रस्ताव
  • 378 कार और 144 दोपहिया वाहनों की क्षमता
  • 6 साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं

3700 गज जमीन पर प्रस्तावित परियोजना
पोस्ट ऑफिस के पास करीब 3700 गज जमीन इस परियोजना के लिए निर्धारित की गई है। इस जमीन के लिए नगर निगम द्वारा करीब 43.66 करोड़ रुपये जमा करवाए जा चुके हैं।
इसके अलावा पुरानी बिल्डिंग को गिराने के लिए पीडब्ल्यूडी को 17 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया है।
नगर निगम का कहना है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टेंडर जारी कर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

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