गुरुग्राम की राजनीति में रविवार को बड़ा उलटफेर हुआ। नगर निगम चुनाव में भाजपा से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल करने वाले सात पार्षदों ने एक बार फिर से भाजपा का दामन थाम लिया। यह ज्वाइनिंग चंडीगढ़ स्थित कबीर कुटीर में आयोजित कार्यक्रम में हुई, जहां मुख्यमंत्री नायब सैनी और प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बडौली ने सभी पार्षदों को भाजपा का पटका पहनाकर पार्टी में शामिल कराया।

यह कदम सीधे तौर पर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के खेमे के लिए सियासी मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
कौन-कौन से पार्षद लौटे भाजपा में?
भाजपा में वापसी करने वालों में शामिल हैं:
- वार्ड 35 से परमिंद्र कटारिया
- प्रदीप परम
- वार्ड 10 से महावीर यादव
- दिनेश दहिया
- अवनीश राघव
- पार्षद प्रतिनिधि प्रशांत भारद्वाज
- गगनदीप किरोड़
इनमें से परमिंद्र कटारिया, महावीर यादव, दिनेश दहिया, अवनीश राघव और गगनदीप किरोड़ को पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते भाजपा ने छह साल के लिए निष्कासित किया था। लेकिन अब उन्हें गुपचुप तरीके से पार्टी में शामिल कर लिया गया।
जिलाध्यक्ष अंधेरे में, संगठन पर उठे सवाल

सबसे हैरानी की बात यह रही कि जिला अध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी को इस घटनाक्रम की खबर तक नहीं लगी। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि रविवार को हुई इस ज्वाइनिंग के बारे में उन्हें सोमवार सुबह जानकारी मिली। इसे जिला नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका और पार्टी संगठन के भीतर बढ़ती खाई के तौर पर देखा जा रहा है।
परमिंद्र कटारिया की वापसी सबसे अहम
गुरुग्राम के पूर्व डिप्टी मेयर परमिंद्र कटारिया की वापसी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। निगम चुनाव में राव इंद्रजीत उन्हें भाजपा से टिकट नहीं दिला पाए थे, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर जीत हासिल की थी। उसी दौरान पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।
अब उनकी भाजपा में वापसी यह दर्शाती है कि राव इंद्रजीत की बढ़ती सियासी ताकत के आगे पार्टी संगठन को झुकना पड़ा है।
नगर निगम की गुत्थी: डिप्टी मेयर पद दांव पर
सूत्रों का कहना है कि इन सात पार्षदों की वापसी का मकसद सिर्फ “घर वापसी” नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीति छिपी है। गुरुग्राम नगर निगम में इस समय सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद खाली हैं। माना जा रहा है कि राव इंद्रजीत का खेमा इस कदम के जरिए इन पदों पर कब्जा जमाने की तैयारी में है।
अब राव नरबीर खेमा भी मैदान में
राव इंद्रजीत की ताकत बढ़ने के बाद अब गुरुग्राम के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह का खेमा भी सक्रिय हो गया है। खबर है कि उन्होंने अपने समर्थकों के साथ गुप्त बैठक बुलाई है, जिसमें नगर निगम में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
इस तरह गुरुग्राम की सियासत में अब दो बड़े खेमों राव इंद्रजीत बनाम राव नरबीर के बीच सीधा टकराव देखने को मिल सकता है।
गुरुग्राम की सियासत में नए समीकरण
सात पार्षदों की भाजपा में वापसी ने गुरुग्राम की राजनीति की पूरी तस्वीर बदल दी है। एक ओर जहां राव इंद्रजीत का दबदबा और बढ़ गया है, वहीं राव नरबीर का खेमा भी इस चुनौती का जवाब देने के लिए कमर कस चुका है।
