गुरुग्राम की कई आवासीय कॉलोनियों में सड़कों की असली हालत काफी खराब है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर बनी तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में सामने आया है कि शहर के कई इलाकों में मोटर चलाने लायक सड़कें बहुत संकरी हैं। इसके अलावा, सड़कों पर गलत तरीके से पार्किंग, घरों के बने रैंप, बिजली के खंभे और अन्य ढांचे रास्ता और भी छोटा कर रहे हैं।

शनिवार को समिति ने गुरुग्राम के कुछ इलाकों में जाकर सड़कों का मौके पर निरीक्षण किया। यह जांच हरियाणा सरकार की स्टिल्ट-प्लस-फोर (S+4) निर्माण नीति के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) के तहत की गई है। इस रिपोर्ट का असर 17 फरवरी को हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर पड़ सकता है।
कहां-कहां हुआ निरीक्षण
समिति ने कुल आठ जगहों का दौरा किया। इनमें डीएलएफ फेज़-1 की छह सड़कें और सेक्टर-28 की दो सड़कें शामिल हैं। यहां पक्की सड़कों की असली चौड़ाई और आमने-सामने बने घरों के बीच की दूरी को मापा गया।
क्या निकला निरीक्षण में
अधिकारियों के अनुसार, डीएलएफ फेज़-1 में दीवार से दीवार के बीच सड़क की कुल चौड़ाई करीब 12 मीटर है, लेकिन वाहनों के चलने के लिए जो पक्की सड़क बचती है, वह सिर्फ 4 से 4.8 मीटर ही है।
सेक्टर-28 में स्थिति और भी खराब है। यहां स्वीकृत सड़क चौड़ाई 10 मीटर है, लेकिन कई जगह पक्की सड़क सिर्फ 3.9 से 4 मीटर चौड़ी पाई गई।
समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि संकरी सड़कों के किनारे खड़े वाहन ट्रैफिक को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। कई जगह दो कारों का एक साथ निकलना मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सड़क की जगह का बड़ा हिस्सा घरों के रैंप, बिजली के उपकरण, सीवर लाइन, पानी की पाइप और पेड़ों की वजह से घिरा हुआ है।
Public Interest Litigation (PIL) में क्या कहा गया है
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि “सड़क” का मतलब वही हिस्सा होना चाहिए, जहां से गाड़ियां चल सकती हैं, न कि पूरा राइट ऑफ वे, जिसमें हरियाली और सर्विस एरिया भी शामिल होते हैं।
उनका दावा है कि संकरी सड़कों की वजह से फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और कचरा उठाने वाली गाड़ियों को आने-जाने में परेशानी होती है, जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि S+4 नीति के कारण आबादी का दबाव बढ़ा है, जिससे ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और बुनियादी सुविधाओं पर बोझ बढ़ रहा है।
प्रशासन का पक्ष
वहीं, बिल्डरों और योजना विभाग का कहना है कि नियमों के अनुसार सड़क की चौड़ाई का मतलब प्लॉटों के बीच का पूरा रास्ता होता है, और पक्की सड़क उसका सिर्फ एक हिस्सा है।
अब सभी की नजरें 17 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि गुरुग्राम में S+4 नीति और सड़क चौड़ाई को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाएगा।
