गुरुग्राम में प्रॉपर्टी आईडी और एनओसी में बड़ा फर्जीवाड़ा, अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री पर सवाल

गुरुग्राम नगर निगम में प्रॉपर्टी आईडी और एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) को लेकर बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कृषि भूमि दर्शाकर अवैध कॉलोनियों में बने मकानों की रजिस्ट्री कराई जा रही है, जिससे न केवल कानून का उल्लंघन हो रहा है बल्कि नगर निगम को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। मामला अब शहरी स्थानीय निकाय मंत्री तक पहुंच चुका है और इसकी गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

कृषि भूमि बनाकर रिहायशी मकानों की आईडी

नियमों के अनुसार शहर में किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए प्रॉपर्टी आईडी और नगर निगम से एनओसी अनिवार्य है। एनओसी तभी जारी होती है, जब संबंधित संपत्ति का विकास शुल्क और संपत्ति कर जमा हो।

लेकिन आरोप है कि टैक्स और शुल्क से बचने के लिए लोग शहरी स्थानीय निकाय विभाग के पोर्टल पर अपने मकानों को **कृषि भूमि** दर्शाकर खुद ही प्रॉपर्टी आईडी जनरेट कर रहे हैं। रिहायशी इलाकों में बने पक्के मकानों को भी कागजों में खेत दिखाया जा रहा है। इस तरह न तो निगम को संपत्ति कर मिलता है और न ही विकास शुल्क।

नगर निगम के रिकॉर्ड में फिलहाल करीब **10 हजार प्रॉपर्टी आईडी कृषि भूमि के नाम पर दर्ज** हैं, जिनमें कई मामलों में जमीन पर रिहायशी भवन बने होने की आशंका जताई जा रही है।

सोनीपत से शुरू हुआ खुलासा, अब गुरुग्राम पर नजर

शहरी स्थानीय निकाय विभाग इससे पहले सोनीपत नगर निगम में इसी तरह की अनियमितताओं का खुलासा कर चुका है। वहां गलत तरीके से एनओसी जारी करने और भूमि श्रेणी बदलकर **50 हजार से ज्यादा फर्जी प्रॉपर्टी आईडी** बनाए जाने की बात सामने आई थी।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब रोहतक और गुरुग्राम नगर निगम से भी ऐसी ही शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इसके चलते जांच के लिए म्यूनिसिपल कमिश्नर और तकनीकी अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित की जाएगी।

अप्रूव्ड–अनअप्रूव्ड का खेल, रजिस्ट्री का रास्ता साफ

शिकायतों में यह भी सामने आया है कि अवैध कॉलोनियों में बने मकानों की प्रॉपर्टी आईडी में जानबूझकर हेरफेर की जाती है। नियमों के तहत अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री नहीं हो सकती, लेकिन आरोप है कि निगम और प्रॉपर्टी माफिया की मिलीभगत से पहले प्रॉपर्टी आईडी में **‘अनअप्रूव्ड’ को ‘अप्रूव्ड’** दिखाया जाता है।

इसके बाद एनओसी जारी कर दी जाती है और जिला राजस्व विभाग के जरिए रजिस्ट्री करवा दी जाती है। कई मामलों में रजिस्ट्री के बाद वही प्रॉपर्टी आईडी खत्म भी करवा दी जाती है, ताकि रिकॉर्ड में गड़बड़ी पकड़ी न जा सके।

2023-24 और 2024-25 के मामलों की होगी जांच

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मुख्यालय ने **वर्ष 2023-24 और 2024-25** में जारी की गई सभी कृषि भूमि संबंधी प्रॉपर्टी आईडी और एनओसी की जांच के निर्देश दिए हैं।

जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर **भौतिक सत्यापन** भी किया जाएगा। ऐसे मामलों पर विशेष नजर रहेगी, जहां दस्तावेजों में जमीन कृषि दिखाई गई है, लेकिन मौके पर बहुमंजिला या आलीशान मकान बने हुए हैं।

निगम को हुआ भारी नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष और सख्त जांच होती है, तो यह हरियाणा का अब तक का सबसे बड़ा प्रॉपर्टी आईडी घोटाला साबित हो सकता है। इससे नगर निगम की आय पर सीधा असर पड़ा है और भविष्य में अवैध निर्माण को बढ़ावा मिला है।

निगम आयुक्त का बयान

गुरुग्राम नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा,

“प्रॉपर्टी आईडी और एनओसी जारी करने में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि इसके नतीजे गुरुग्राम के शहरी विकास और प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।

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