गुरुग्राम रेलवे स्टेशन को द्वारका एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बुधवार को सेक्टर-44 में आयोजित बैठक में इस योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता हरियाणा सरकार के शहरी विकास के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने की। बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

रेलवे स्टेशन के आसपास जाम खत्म करने की तैयारी
बैठक में रेलवे स्टेशन के आसपास लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम पर गंभीर चिंता जताई गई। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो और भोंडसी से मेट्रो लाइन रेलवे स्टेशन तक पहुंचेगी, जिससे मौजूदा संकरी रेलवे रोड पर दबाव और बढ़ेगा।
इस समस्या के समाधान के लिए विशेष सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय लिया गया, जो रेलवे स्टेशन तक सुचारू यातायात के लिए डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करेगा।

ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो में आ रही बाधाओं पर समीक्षा
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए जीएमआरएल अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-33 में मेट्रो डिपो निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है। एचएसवीपी द्वारा मार्बल मार्केट हटाया जा चुका है।
हालांकि, हीरो होंडा चौक से सेक्टर-9 तक कुछ मकान और दुकानें मेट्रो कॉरिडोर के बीच आ रही हैं। इनका अधिग्रहण मेट्रो की भूमि अधिग्रहण नीति के तहत किया जाएगा।
द्वारका एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए बन सकती है भूमिगत टनल
रेलवे स्टेशन को द्वारका एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए जीएमआरएल अधिकारियों ने भूमिगत टनल बनाने का सुझाव दिया, जो द्वारका एक्सप्रेसवे टनल की तर्ज पर होगी।
इसके साथ ही दौलताबाद रोड को चौड़ा करने के लिए जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव भी रखा गया।
डीएस ढेसी ने जीएमडीए अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेलवे स्टेशन तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द डीपीआर तैयार कराई जाए।
सेक्टर-5 में बनेगा मेट्रो इंटरचेंज
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो को रेलवे स्टेशन से जोड़ने के लिए करीब 2 किलोमीटर लंबी अलग मेट्रो लाइन बनाई जाएगी।
अब मेट्रो लाइन भोंडसी से सीधे रेलवे स्टेशन तक न जाकर भोंडसी से सेक्टर-5 तक बनेगी, जहां इंटरचेंज स्टेशन विकसित किया जाएगा।
मेट्रो निर्माण के लिए लगभग 9 मीटर चौड़ी जमीन की आवश्यकता होगी। अधिकारियों ने माना कि निर्माण के दौरान और बाद में रेलवे रोड पर ट्रैफिक प्रबंधन बड़ी चुनौती रहेगा।
