क्या खत्म होगी ओवरफ्लो की समस्या? GMDA ने जारी किया बड़ा टेंडर

गुरुग्राम: तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार और हाई-राइज रिहायशी परियोजनाओं के दबाव के बीच Gurugram Metropolitan Development Authority (GMDA) ने सीवरेज नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने सेक्टर 77 से 80 के बीच करीब 10 किलोमीटर लंबी मास्टर सीवर लाइन बिछाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है।

इस परियोजना पर लगभग 31.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम विशेष रूप से Dwarka Expressway के आसपास तेजी से विकसित हो रहे आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

क्यों जरूरी है यह परियोजना?
पिछले कुछ वर्षों में न्यू गुरुग्राम और द्वारका एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के आसपास बड़ी संख्या में हाई-राइज सोसाइटियां और कॉमर्शियल हब विकसित हुए हैं। मौजूदा सीवर नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को देखते हुए GMDA ने क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया है।
प्राधिकरण के अनुसार:

  • नई लाइन से अपशिष्ट जल के प्रवाह की क्षमता बढ़ेगी
  • ओवरफ्लो और बैकफ्लो की समस्या कम होगी
  • भविष्य के शहरी विस्तार को सपोर्ट मिलेगा
  • अन्य सेक्टरों में भी चल रही हैं परियोजनाएं

GMDA सेक्टर 68–76 और द्वारका एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के सेक्टर 105–115 में भी सीवर लाइन बिछाने की परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य गुरुग्राम में एक निर्बाध और मजबूत सीवरेज नेटवर्क तैयार करना है।

100-100 एमएलडी के नए एसटीपी होंगे तैयार
सीवरेज क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ GMDA ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी फोकस कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक:

  • सेक्टर 103 (धनवापुर) और बेहरामपुर में 100 एमएलडी क्षमता के नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) विकसित किए जाएंगे
  • सेक्टर 107 में भी 100 एमएलडी का एक और एसटीपी प्रस्तावित है
  • नौरंगपुर में 40 एमएलडी क्षमता का संयंत्र भी प्रस्तावित है

इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।

आधुनिक तकनीक से होगा ट्रीटमेंट
प्रस्तावित एसटीपी में आधुनिक ट्रीटमेंट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे:

  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी
  • शुद्ध जल की गुणवत्ता बेहतर होगी
  • ट्रीटेड वाटर का उपयोग बागवानी और औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गुरुग्राम की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे भविष्य में जलभराव और प्रदूषण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।

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