साइबर सिटी गुरुग्राम में बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब लोग सड़कों पर उतरने लगे हैं। रविवार को साउथ पेरिफेरल रोड (एसपीआर) पर एक अनोखा और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जब सेक्टर-69, 70, 71 और द्वारका एक्सप्रेसवे क्षेत्र की सोसायटियों के निवासियों ने वाटिका चौक के पास जमा होकर ‘मिट्टी की होली’ खेली।
यह प्रदर्शन एसपीआर किनारे और बरसाती नाले की खुदाई के बाद निकाली गई मिट्टी के महीनों से पड़े विशाल ढेरों के खिलाफ किया गया। लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी अब शहर की हवा को जहरीला बना रही है।
धूल बन रही है शहर की नई मुसीबत
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, ड्रेनेज क्षेत्र से निकाली गई मिट्टी खुले में पड़ी है। मुख्य सड़कों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण वाहनों के गुजरते ही धूल के गुबार उठते हैं, जो आसपास की सोसायटियों से लेकर पूरे शहर में फैल जाते हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि:
“यह सिर्फ सेक्टर 69-71 की समस्या नहीं है। यह पूरे गुरुग्राम की हवा को प्रभावित कर रही है।”
गर्मी बढ़ने के साथ धूल भरी आंधियों का खतरा और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में सांस लेना भी मुश्किल हो सकता है।
जीएमडीए की कार्यशैली पर सवाल
प्रदर्शन में शामिल वरिष्ठ पेशेवरों और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि:
- शहर का AQI लगातार खराब श्रेणी में बना हुआ है
- प्रदूषण नियंत्रण के दावे ज़मीनी स्तर पर नजर नहीं आते
- महीनों से पड़े मिट्टी के ढेर हटाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
निवासियों का आरोप है कि प्रशासनिक चुप्पी हालात को और बिगाड़ रही है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
निवासियों ने प्रशासन से तत्काल निम्न कदम उठाने की मांग की है:
- निर्माण स्थलों पर सख्त धूल नियंत्रण उपाय लागू किए जाएं
- मुख्य सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपिंग बढ़ाई जाए
- खुले में पड़ी मिट्टी को तुरंत ढका या हटाया जाए
- ड्रेनेज और बरसाती नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए
आंदोलन होगा और बड़ा?
प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। उनका कहना है कि यह विरोध राजनीति नहीं, बल्कि “स्वच्छ हवा के अधिकार” के लिए है।
गौरतलब है कि गुरुग्राम पहले ही देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहा है। ऐसे में नागरिकों की बढ़ती सक्रियता प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
