होली पर घर जाना बना चुनौती, गुरुग्राम से यूपी-बिहार-बंगाल की ट्रेनों में ‘रिग्रेट’ की मार

गुरुग्राम। होली का त्योहार नजदीक आते ही गुरुग्राम से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जाने वाली ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ उमड़ पड़ी है। हालात ऐसे हैं कि अधिकतर एक्सप्रेस ट्रेनों में सीटें पूरी तरह फुल हो चुकी हैं और वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं है। रेलवे की बुकिंग साइट पर ‘रिग्रेट’ का मैसेज दिखाई दे रहा है, यानी अब टिकट जारी नहीं किया जा सकता।

दिल्ली से भी नहीं मिल रही राहत
गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से सीधी ट्रेनों की संख्या सीमित है, इसलिए बड़ी संख्या में यात्री दिल्ली से रिजर्वेशन करवाते हैं। लेकिन दिल्ली से संचालित होने वाली ट्रेनों में भी सीटों की स्थिति बेहद खराब है। 28 फरवरी से 3 मार्च के बीच चलने वाली लगभग सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट भी बंद हो चुकी है।

तत्काल टिकट भी बनेगा सहारा या धोखा?
कई यात्री अब तत्काल टिकट के भरोसे घर जाने की योजना बना रहे हैं। नियम के अनुसार ट्रेन रवाना होने से 24 घंटे पहले तत्काल टिकट बुक किया जा सकता है। लेकिन त्योहार की भारी भीड़ को देखते हुए तत्काल टिकट मिलना भी आसान नहीं होगा। ऑनलाइन बुकिंग के साथ-साथ विंडो टिकट के लिए भी रेलवे स्टेशन पर भीड़ बढ़ने की संभावना है।

वीकेंड और होली का डबल असर
इस बार 4 मार्च को होली मनाई जाएगी, जबकि 28 फरवरी और 1 मार्च को वीकेंड है। ऐसे में नौकरीपेशा लोग लंबी छुट्टी लेकर घर जाने की तैयारी में हैं। इसी वजह से 28 फरवरी से 3 मार्च के बीच ट्रेनों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हो गई है।

शुक्रवार शाम बरेली की ओर जाने वाली एक ट्रेन में भारी भीड़ देखने को मिली। आम दिनों में भी सीमित ट्रेनों के कारण मारामारी रहती है, लेकिन त्योहार के समय हालात और बिगड़ सकते हैं।

डग्गामार वाहनों का बढ़ सकता है खतरा
टिकट न मिलने की स्थिति में कई यात्री बसों और डग्गामार वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हो सकते हैं। ये वाहन जहां अधिक किराया वसूलते हैं, वहीं ओवरलोडिंग के कारण यात्रा जोखिम भरी भी हो सकती है।

यात्रियों की मांग – चलाई जाएं स्पेशल ट्रेनें
यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से होली के मद्देनजर गुरुग्राम और दिल्ली से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अतिरिक्त ट्रेनें नहीं चलाई गईं तो हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।

त्योहार पर घर जाने की उम्मीद लगाए बैठे प्रवासी मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों की निगाहें अब रेलवे प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं।

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