हरियाणा सरकार ने रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब इस परियोजना का प्रथम चरण धारूहेड़ा तक नहीं, बल्कि बावल तक विकसित किया जाएगा। हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (HMRT C) ने इस संबंध में नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (NCRTC) को औपचारिक रूप से अवगत करा दिया है।

एचएमआरटीसी के प्रबंध निदेशक डा. चंद्रशेखर खरे ने एनसीआरटीसी के एमडी को पत्र लिखकर बताया कि राज्य सरकार ने विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया है कि आरआरटीएस कॉरिडोर को धारूहेड़ा की बजाय बावल तक बढ़ाया जाएगा।
राव इंद्रजीत सिंह ने जताई थी आपत्ति
स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय योजना, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने बीते 18 सितंबर को गुरुग्राम में आयोजित अधिकारियों की बैठक में धारूहेड़ा तक सीमित विकास के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी।
उन्होंने तर्क दिया था कि रेवाड़ी का बावल क्षेत्र एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है, जहां हजारों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। ऐसे में यदि प्रथम चरण में ही कॉरिडोर को बावल तक विस्तारित किया जाए तो अधिक से अधिक लोगों को सुविधा मिलेगी।
राव इंद्रजीत सिंह ने इस विषय पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
प्रोजेक्ट की रूपरेखा
दिल्ली के सराय काले खां से लेकर राजस्थान के अलवर तक आरआरटीएस कॉरिडोर का विकास तीन चरणों में किया जाना है।
पहला चरण: दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी (शाहजहांपुर-नीमराणा-बहरोड़) तक 106 किमी लंबा मार्ग
दूसरा चरण: सोतानाला तक विस्तार
तीसरा चरण: अलवर तक विस्तार
कॉरिडोर पर हर 10 से 15 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी, जो औसतन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।
औद्योगिक विकास से जुड़ेगा फायदा
धारूहेड़ा से आगे स्थित बावल हरियाणा का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां कार्यरत हैं। साथ ही यहां मल्टी लॉजिस्टिक हब का तेजी से विस्तार हो रहा है।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा
“मेरा मानना है कि बावल तक ही नहीं, बल्कि राजस्थान के शाहजहांपुर तक भी विस्तार होना चाहिए। राजस्थान सरकार को केंद्र से संपर्क कर अपनी सहमति और वित्तीय सहयोग देना चाहिए। बावल तक निर्माण कार्य के लिए केंद्रीय कैबिनेट से जल्द मंजूरी दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।”
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