नया गुरुग्राम कहलाने वाले मानेसर क्षेत्र की सच्चाई आज भी बदहाल सड़कों में दबी हुई है। सेक्टर-82 में सिर्फ 500 मीटर सड़क न बनने से हजारों लोग रोज़ नरक जैसी स्थिति झेलने को मजबूर हैं। दो साल से शिकायतें चल रही हैं, पर समस्या “नई गुरुग्राम की झील” बनकर अब भी वहीं की वहीं है।

लोगों का आरोप: अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं, काम ज़ीरो
इस सड़क का निर्माण बिल्डर को करना था, लेकिन न सड़क बनी, न नाले। भारी बारिश में पूरा इलाका तालाब बन जाता है और फिसलन इतनी कि पैदल निकलना भी संभव नहीं रह जाता।
लोगों का कहना है—
“हम टैक्स समय पर देते हैं, बिल्डर EDC-IDC चुका चुका है… फिर भी हमें घर तक जाने को रास्ता नहीं मिलता। क्या यही नया गुरुग्राम है?”
10 करोड़ के घर, लेकिन बुनियादी सुविधाएँ नदारद
सिग्नेचर विला, जहाँ मकानों की कीमत 8–10 करोड़ रुपये तक की है, वहाँ रहने वाले लोग आज भी टूटी पगडंडी के सहारे अपने घर पहुँचते हैं।
नगर निगम मानेसर, GMDA, डीसी ऑफिस और सीएम विंडो — हर जगह शिकायतें की गईं, मगर कार्रवाई कोई नहीं।
बिल्डर-GMDA के बीच हैंडओवर का झोल, फँसे लाखों लोग
- सड़क — बिल्डर बनाएगा
- नाला — GMDA बनाएगा
लेकिन हैंडओवर प्रक्रिया अधर में अटकी होने के कारण काम पूरी तरह बंद है। नतीजा—
लाखों में प्लॉट बेचने वाले बिल्डर और करोड़ों में घर खरीदने वाले निवासी, दोनों ही परेशानी में।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक छोटी सी 500 मीटर सड़क नए गुरुग्राम की असली तस्वीर दिखाती है—जहाँ विकास का दावा सिर्फ बोर्डों और विज्ञापनों में दिखाई देता है।
