स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन पर जहां आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजता है, वहीं यह नजारा पक्षियों के लिए मौत का जाल बन जाता है।
मांझे में फंसकर कई परिंदों के पंख कट रहे हैं, हड्डियां टूट रही हैं और कुछ की तो जान तक चली जाती है।

7 महीनों का दर्दनाक आंकड़ा
- जनवरी से जुलाई तक 30 से ज्यादा पक्षी घायल होकर पहुंचे।
- 9 से 15 अगस्त के बीच 25 परिंदों की जान बचाई गई।
- ज्यादातर मामले द्वारका एक्सप्रेसवे और सोसाइटियों से आए।
कबूतर, चील, तोते सब शिकार
डॉक्टरों के मुताबिक—
- कबूतर सबसे ज्यादा घायल हो रहे हैं।
- इसके बाद चील और तोते भी मांझे में उलझकर गिर रहे हैं।
- कबूतर किसी तरह बच जाते हैं, लेकिन दूसरी प्रजातियों को मौत से जूझना पड़ता है।
पक्षियों का अस्पताल बना सहारा
जैकबपुरा स्थित धर्मार्थ पक्षी चिकित्सालय में लगातार घायल पक्षी लाए जा रहे हैं।
डॉ. राजकुमार का कहना है—
“त्योहारों पर मामले बढ़ जाते हैं। कई बार परिंदे की जान बचाने के लिए उसके घायल हिस्से को काटना पड़ता है।”
यहां पक्षियों के लिए शेल्टर भी बनाया गया है, जहां उड़ने में असमर्थ पक्षियों की देखभाल की जाती है।
आपके लिए जरूरी अपील
अगर घायल पक्षी दिखे तो—
- तुरंत उसकी ब्लीडिंग रोकें।
- उसे पॉलीथिन में न बंद करें, गत्ते के डिब्बे में रखें।
- जहां मांझा दिखे, वहां की सूचना पुलिस को दें।
