एक साल, करोड़ों रुपये, और मशीनें… फिर भी शहर में कचरा ही कचरा!

नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। निगम ने अगस्त 2024 में शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 98 लाख रुपये की लागत से दो जटायु मशीनें खरीदीं, लेकिन यह दोनों मशीनें पिछले एक साल से निगम कार्यालय में खड़ी धूल फांक रही हैं।

ड्राइवर न मिलने से मशीनें बेकार

इन मशीनों का मकसद बाजारों और मार्केट से कूड़ा उठाना था। लेकिन निगम के पास न तो प्रशिक्षित चालक हैं और न ही संचालन की कोई ठोस योजना। अधिकारियों का कहना है कि

  • मशीनें मिश्रित कचरा नहीं उठा पा रही हैं।
  • एक बार प्रयोग करने के बाद इन्हें साफ करना पड़ता है।
  • क्षमता एक टन से कम है और संचालन में 2-3 कर्मचारी लगते हैं।
  • खर्च भी अधिक आता है, इसलिए एजेंसियां भी संचालन से पीछे हट रही हैं।

दो बार हुआ शुभारंभ, फिर भी बेकार

यह स्थिति तब है जब इन मशीनों का उद्घाटन विधायक मुकेश शर्मा और मेयर दो बार कर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक यह मशीनें निगम कार्यालय में धूल फांक रही हैं।

सफाई अभियान पर करोड़ों का बजट

गौरतलब है कि शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर 11 जून 2024 को ‘कूड़े का आपातकाल’ लागू किया गया था। मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री ने भी निरीक्षण कर सुधार के निर्देश दिए थे।
फिर भी

  • निगम के पास पहले से 13 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें हैं।
  • सालाना ₹570 करोड़ का बजट है।
  • 7 निजी एजेंसियों को टेंडर भी दिए गए हैं।
  • इसके बावजूद शहर साफ नहीं हो पा रहा है।

ई-रिक्शा भी गायब

इतना ही नहीं, बीते साल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 50 से अधिक ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इनका मकसद घर-घर से कूड़ा उठाना था। लेकिन यह सभी ई-रिक्शा भी कभी शहर की सड़कों पर नजर नहीं आईं। कुछ समय ये बेरी बाग एमआरएफ सेंटर में खड़ी रहीं, लेकिन अब वहां से भी गायब हो गई हैं।

निगम आयुक्त का दावा

निगम आयुक्त प्रदीप दहिया का कहना है कि,

इन मशीनों का संचालन क्यों नहीं हो रहा है, इसकी जांच की जाएगी। जल्द ही कूड़ा उठाने का काम शुरू करवाया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।



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