गुरुग्राम के सेक्टर-68 में नगर निगम की टीम ने कांग्रेस नेता राजेश यादव और उनके भाई की करोड़ों रुपए कीमत की बिल्डिंग पर बुलडोजर चला दिया। यह कार्रवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट और नगर निगम के डीटीपी आरएस बाठ की अगुआई में की गई।

कार्यवाही के दौरान राजेश यादव ने इसे राजनीतिक उत्पीड़न करार देते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई कैबिनेट मंत्री के इशारे पर की जा रही है। मौके पर उन्होंने डीटीपी आरएस बाठ से बहस की और उन्हें “सुपारी बाज अधिकारी” तक कह दिया। इससे गुस्साए डीटीपी आरएस बाठ ने पुलिस अधिकारियों को राजेश यादव को पकड़ने का आदेश दिया। पुलिस ने उन्हें पकड़कर कार तक ले जाया और फिर थाने भेज दिया।

नगर निगम का दावा
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह बिल्डिंग अवैध तरीके से बनाई गई थी और इसके लिए पहले नोटिस भी जारी किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि अवैध निर्माण शहर की सुरक्षा और सुंदरता के लिए खतरा है।

राजेश यादव का आरोप
राजेश यादव ने दावा किया कि वे गरीबों के लिए आवाज उठाते हैं और यही कारण है कि भाजपा उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारी गुंडागर्दी कर रहे हैं और उन्हें बिल्डर हितैषियों के इशारे पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बिल्डिंग तोड़ने या बचाव के लिए कोई समय नहीं दिया गया।

आरएस बाठ का जवाब
डीटीपी आरएस बाठ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिल्डिंग अवैध तरीके से बनी थी और कार्रवाई कानून के अनुसार की गई। उन्होंने कहा, “अगर कोई कहे कि मैंने किसी की सुपारी लेकर यह काम किया तो ये गलत है। डॉनगिरी वही होती है जो डेढ़-डेढ़ करोड़ की बिल्डिंग बिना अनुमति के बनाई जाती है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई उन्हें डॉनगिरी दिखाएगा तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक तनाव बढ़ा
राजेश यादव के पुलिस हिरासत में लेने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। गुरुग्राम में राजनीतिक माहौल इस घटना के बाद और भी गर्मा गया है।
