गुरुग्राम शहर में हर साल मॉनसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या को स्थायी समाधान देने के लिए नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने IIT गांधीनगर के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू साइन किया है। यह समझौता एक साल के लिए किया गया है, जिसके तहत IIT की विशेषज्ञ टीम गुरुग्राम में रहकर जल निकासी व्यवस्था का वैज्ञानिक मॉडल तैयार करेगी।

MCG ने IIT की टीम को GIS सर्वे से जुड़े सभी डेटा उपलब्ध करा दिए हैं। इन आंकड़ों में शहर की ऊंचाई-निचाई, मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क और पानी भरने वाले सभी हॉटस्पॉट्स की जानकारी शामिल है। यही डेटा आगे का पूरा वैज्ञानिक मॉडल तैयार करने का आधार बनेगा।
गुरुग्राम में जलभराव: सालों से बढ़ती हुई समस्या
गुरुग्राम में कुछ ही मिनट की बारिश के बाद
- हीरो होंडा चौक
- इफको चौक
- नरसिंहपुर
- सेक्टर 31, 32, 37
जैसे प्रमुख क्षेत्रों में घुटनों तक पानी भरना आम बात हो जाती है।
शहर की
- अनियोजित प्लानिंग
- अतिक्रमण
- पुराने और संकरे नाले
- सीवर और ड्रेनेज लाइनों के मिश्रण
के कारण जल निकासी सिस्टम बार-बार फेल हो जाता है। इससे ट्रैफिक जाम, आर्थिक नुकसान और नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
IIT गांधीनगर क्या करेगा?
IIT की टीम एक साल में गुरुग्राम के लिए एक मास्टर ड्रेनेज मॉडल तैयार करेगी, जिसमें शामिल होगा:
कहां बनें नए नाले
टीम शहर के उन पॉइंट्स की पहचान करेगी जहां पानी निकालने के लिए नए ड्रेनेज स्ट्रक्चर की जरूरत है।
पुरानी व्यवस्था की पूरी जांच
मौजूदा ड्रेनेज लाइनों की क्षमता, डिजाइन और उनकी कमियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।
तकनीकी समाधान
IIT बताएगा कि
- कहां अंडरग्राउंड चैंबर बन सकते हैं
- कहां नए पंपिंग स्टेशन लगाने होंगे
- किस तरह का स्टॉर्म वॉटर नेटवर्क गुरुग्राम के लिए कारगर रहेगा
भविष्य की योजनाओं का ब्लूप्रिंट
नगर निगम की आने वाली सभी ड्रेनेज परियोजनाएं इसी वैज्ञानिक मॉडल पर आधारित होंगी, ताकि फंड की बर्बादी न हो और काम का असर जमीन पर दिखे।
निगम आयुक्त प्रदीप दहिया का बयान
IIT गांधीनगर के साथ एमओयू साइन कर दिया गया है। टीम एक साल में गुरुग्राम के लिए ड्रेनेज मॉडल तैयार करेगी। आगे की सभी योजनाएं इसी मॉडल के अनुसार बनाई जाएंगी। IIT का प्रस्तुतीकरण निगम को मिल चुका है।
