शहर की सबसे हाई-प्रोफाइल कही जाने वाली डीएलएफ फेज-1 से लेकर फेज-5 तक की रिहायशी कॉलोनियों में अब हड़कंप मचा हुआ है। जिला टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) विभाग की जांच में यह सामने आया है कि 4183 मकानों में या तो अवैध निर्माण किया गया है या फिर उनका उपयोग नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधियों में हो रहा है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अब इन सभी मकानों की पूरी सूची विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। साथ ही मकान मालिकों को 31 दिसंबर 2025 तक अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया गया है।
घर बने होटल, पीजी और क्लिनिक, पार्किंग बनी दुकानें
हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं में खुलासा हुआ कि—
- कई मकानों में बिना अनुमति अतिरिक्त मंजिलें खड़ी कर दी गईं
- पार्किंग एरिया और ओपन स्पेस में दुकानें और दफ्तर खोल दिए गए
- रिहायशी घरों को होटल, पीजी, गेस्ट हाउस और क्लिनिक में तब्दील कर दिया गया
- मूल स्वीकृत नक्शों और बिल्डिंग बायलॉज को पूरी तरह दरकिनार किया गया
इन्हीं शिकायतों के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सरकार और प्रशासन को पूरी जांच के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद चला सर्वे, हुआ बड़ा खुलासा
अदालत के आदेश के बाद टीसीपी विभाग ने डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 तक डोर-टू-डोर सर्वे कराया। जांच रिपोर्ट में हजारों मकानों में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई, जिसके बाद अब कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
31 दिसंबर 2025 के बाद शुरू होगी सीधी कार्रवाई
टीसीपी विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मकानों के नाम सूची में शामिल हैं, उन्हें 31 दिसंबर 2025 तक अपनी आपत्तियां दर्ज करानी होंगी। इसके बाद—
- अवैध हिस्सों को सील किया जा सकता है
- तोड़फोड़ की कार्रवाई संभव है
- गलत तरीके से चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कराया जाएगा
हजारों परिवारों में बढ़ी चिंता
DLF जैसे पॉश इलाके में इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की तैयारी से हजारों परिवारों की चिंता बढ़ गई है। लोगों को डर है कि अगर उनका घर सूची में शामिल हुआ तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
