दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे की बदहाल स्थिति को देखते हुए आखिरकार इसकी मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। सबसे पहले मुख्य मार्ग पर बने गड्डों को भरा जा रहा है, ताकि कोहरे के मौसम में होने वाले हादसों को रोका जा सके। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे के किनारे लगे पेड़ों की छंटाई और खराब लाइटों को ठीक करने का कार्य भी तेज़ी से चल रहा है।

धौलाकुआं से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक दिल्ली-जयपुर हाईवे का हिस्सा दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे कहलाता है। पिछले दो-तीन वर्षों से रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान न दिए जाने के कारण एक्सप्रेसवे की हालत काफी खराब हो गई थी। जगह-जगह गड्डे बन चुके हैं और सबसे ज्यादा खराब स्थिति गुरुग्राम क्षेत्र में देखने को मिल रही है।
गुरुग्राम हिस्से की हालत सबसे खराब
सिरहौल बॉर्डर से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक का हिस्सा गुरुग्राम में पड़ता है। इस पूरे सेक्शन में न तो रेलिंग दुरुस्त है और न ही एंट्री-एग्जिट प्वाइंट सही स्थिति में हैं। अधिकतर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। वहीं हीरो होंडा चौक से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक दोनों ओर की सर्विस लेन इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर अवैध कट बने हुए हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
एनएचएआई ने बनाई पूरी मरम्मत की योजना
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे की पूरी तरह मरम्मत की योजना तैयार कर काम शुरू कर दिया है। ग्रैप (GRAP) को ध्यान में रखते हुए फिलहाल गड्डों को भरने और पेड़ों की छंटाई का कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में मुख्य मार्ग के सभी गड्डे भर दिए जाएंगे और एक सप्ताह के भीतर पेड़ों की छंटाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद रेलिंग दुरुस्त करने और लेन मार्किंग पर विशेष जोर दिया जाएगा।
सर्विस लेन को किया जाएगा ऊंचा
नरसिंहपुर के आसपास दोनों ओर एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन को ऊंचा किया जाएगा। यहां आरएमसी (रेडी मिक्स कंक्रीट) की सड़क बनाई जाएगी, ताकि मानसून के दौरान जलभराव के बावजूद सड़क को नुकसान न पहुंचे। हर साल बारिश में नरसिंहपुर और आसपास के इलाकों में जलभराव की समस्या के कारण सर्विस लेन टूट जाती है।
हालांकि, सर्विस लेन को बेहतर बनाने का कार्य ग्रैप हटने के बाद ही तेज़ी से किया जाएगा। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि ग्रैप के कारण निर्माण कार्य की रफ्तार प्रभावित हो रही है। ग्रैप पूरी तरह हटते ही मरम्मत कार्य में तेजी लाई जाएगी और अगले कुछ महीनों में एक्सप्रेसवे की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
मरम्मत के बाद नियमित निरीक्षण जरूरी
एनएचएआई के पूर्व तकनीकी सलाहकार जे.एस. सुहाग का कहना है कि एक्सप्रेसवे की हालत खराब होने का मुख्य कारण अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण न करना है। यदि अधिकारी लगातार राउंड पर रहें तो रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियां सतर्क रहेंगी।
उन्होंने सुझाव दिया कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाना चाहिए और कहीं भी गड्डा बनने पर 24 घंटे के भीतर उसे भरने की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही मरम्मत के दौरान गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे की दुर्दशा से एनएचएआई की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है। अब इस महत्वपूर्ण मार्ग का पूरी तरह कायाकल्प कर न केवल यातायात को सुरक्षित बनाना होगा, बल्कि प्राधिकरण की साख भी दोबारा मजबूत करनी होगी।
