मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए प्रदेश सरकार शहर की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इसी कड़ी में सेक्टर-56 से पचगांव तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर की प्रगति को लेकर शुक्रवार को अहम बैठक हुई।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को संशोधित डीपीआर (Detailed Project Report) तय समय सीमा में तैयार कर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। सरकार का फोकस है कि जरूरी औपचारिकताएं जल्द पूरी हों और मेट्रो प्रोजेक्ट को मंजूरी और निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

सेक्टर-56 से पचगांव तक 35.25 किलोमीटर का रूट
प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर की लंबाई 35.25 किलोमीटर होगी। इस रूट पर कुल 28 स्टेशन बनाए जाने प्रस्तावित हैं। मेट्रो का रूट गुरुग्राम के कई बड़े रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इलाकों को जोड़ेगा। इससे गुरुग्राम के साथ-साथ मानेसर और पचगांव क्षेत्र के लोगों को भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक इस कॉरिडोर के शुरू होने से सड़क पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
किन इलाकों से होकर गुजरेगी मेट्रो?
प्रस्तावित मेट्रो रूट सेक्टर-56 से शुरू होगा। इसके बाद यह सेक्टर-61, 65, 66, 50 और 49 होते हुए आगे बढ़ेगा। इसके बाद कॉरिडोर खेड़की दौला, ग्लोबल सिटी, न्यू गुरुग्राम के सेक्टर-84, 86 और 90, फिर आईएमटी मानेसर से होते हुए पचगांव तक पहुंचेगा। इन इलाकों में तेजी से हो रहे निर्माण, बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए इस मेट्रो कॉरिडोर को भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रैपिड मेट्रो और आरआरटीएस से भी जोड़ा जाएगा
बैठक में सिर्फ नए मेट्रो रूट पर ही नहीं, बल्कि इसे दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। प्रस्तावित कॉरिडोर को रैपिड मेट्रो, आरआरटीएस और हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) समेत भविष्य में विकसित होने वाली दूसरी रेल आधारित परिवहन व्यवस्थाओं से जोड़ने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि यात्रियों को एक ट्रांसपोर्ट सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक पहुंचने में आसानी होगी और गुरुग्राम में एक बेहतर इंटीग्रेटेड पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार किया जा सकेगा।
90 KM प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
प्रस्तावित मेट्रो प्रोजेक्ट मीडियम कैपेसिटी मेट्रो रेल सिस्टम पर आधारित होगा। इसकी डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे प्रस्तावित की गई है। मेट्रो के संचालन को ज्यादा सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए इसमें CBTC यानी Communication Based Train Control सिग्नलिंग सिस्टम इस्तेमाल करने का प्रावधान रखा गया है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों से कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट की प्लानिंग सिर्फ आज की ट्रैफिक जरूरतों को देखकर नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने अगले 15 से 20 साल में गुरुग्राम में बढ़ने वाली आबादी, शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर मेट्रो की क्षमता और नेटवर्क की योजना तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि डीपीआर तैयार करते समय ही सभी जरूरी प्लानिंग से जुड़े मुद्दों का समाधान कर लिया जाए, ताकि आगे चलकर प्रोजेक्ट में किसी तरह की देरी या परेशानी न हो।
गुरुग्राम के लिए क्यों अहम है यह मेट्रो प्रोजेक्ट?
गुरुग्राम में नए सेक्टर, ग्लोबल सिटी और मानेसर जैसे इलाकों में तेजी से विकास हो रहा है। इसके साथ ही रोजाना बड़ी संख्या में लोग इन क्षेत्रों के बीच सफर करते हैं। ऐसे में सेक्टर-56 से पचगांव तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर न सिर्फ नए विकसित हो रहे इलाकों को कनेक्ट कर सकता है, बल्कि गुरुग्राम-मानेसर क्षेत्र में सड़क पर बढ़ते ट्रैफिक को कम करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल प्रोजेक्ट की संशोधित डीपीआर को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर फोकस है। इसके बाद परियोजना को मंजूरी और आगे के क्रियान्वयन की दिशा में बढ़ाया जाएगा।
