गुरुग्राम शहर की टूटी सड़कों और गड्ढों से परेशान लोगों के लिए नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। गुरुग्राम नगर निगम में हुई सदन की बैठक के बाद शहर में अगले दो साल तक रोड रिपेयरिंग और पेचवर्क अभियान चलाया जाएगा। मेयर राजरानी मल्होत्रा ने शुक्रवार को इस अभियान की शुरुआत की।
नगर निगम के मुताबिक, शहर में रोजाना 6 गाड़ियां अलग-अलग इलाकों में भेजी जाएंगी। इन गाड़ियों के जरिए टूटी सड़कों और गड्ढों की जरूरत के हिसाब से मरम्मत की जाएगी। खास तौर पर ज्यादा ट्रैफिक और लोगों की ज्यादा आवाजाही वाले रास्तों पर ध्यान दिया जाएगा।

दो साल तक लगातार होगी सड़कों की मरम्मत
नगर निगम का कहना है कि यह अभियान करीब दो साल तक चलेगा। इस दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में सड़कों की स्थिति को देखकर पेचवर्क कराया जाएगा। इससे लंबे समय से गड्ढों और टूटी सड़कों की समस्या झेल रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया ने बताया कि सड़कों की मरम्मत का काम लगातार जारी रखा जाएगा, ताकि सड़कें ज्यादा खराब होने से पहले ही उनकी मरम्मत की जा सके।
शहर के मुद्दों पर नजर रखेंगी 14 समितियां
सदन की बैठक में नगर निगम ने शहर से जुड़े अलग-अलग मुद्दों की निगरानी के लिए 14 AD-HOC समितियों का गठन भी किया है। इन समितियों में पार्षदों को अध्यक्ष और सदस्य की जिम्मेदारी दी गई है। इन समितियों के जरिए शहर की सफाई, जलापूर्ति, ड्रेनेज, भवन नियम, टैक्स और फीस, शिक्षा, सामाजिक कल्याण, बाजार, फायर ब्रिगेड, विजिलेंस और सड़कों से जुड़े मामलों पर नजर रखी जाएगी।

मेयर के पास सौंदर्यीकरण और स्वच्छता समिति की जिम्मेदारी
सौंदर्यीकरण, स्वच्छता और जनस्वास्थ्य समिति की अध्यक्षता मेयर राजरानी मल्होत्रा करेंगी। वहीं जलापूर्ति और ड्रेनेज से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी अनूप सिंह को दी गई है। इसके अलावा भवन नियमों की निगरानी, ग्रामीण और स्लम क्षेत्रों के विकास, बाजारों से जुड़े मुद्दों और सड़कों एवं चौकों के नामकरण के लिए भी अलग-अलग समितियां बनाई गई हैं।
समितियां देंगी समस्याओं पर सुझाव
नगर निगम के मुताबिक, सभी समितियां अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों और समस्याओं की समीक्षा करेंगी। इसके बाद जरूरत के हिसाब से सदन के सामने सुझाव और कार्रवाई के प्रस्ताव रखे जाएंगे। अब रोड रिपेयरिंग अभियान और इन नई समितियों के गठन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि गुरुग्राम की टूटी सड़कों, जलभराव, ड्रेनेज और सफाई जैसी समस्याओं पर जमीन पर कितनी तेजी से काम होता है।
