अब गुरुग्राम और हरियाणा के अन्य जिलों में पेड़ काटने से पहले वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है। बिना अनुमति पेड़ काटने पर वन संरक्षण अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

इस कदम का उद्देश्य न सिर्फ पेड़ों की कटाई रोकना है, बल्कि शहर और प्रदेश में हरियाली बढ़ाना भी है। पहले गुरुग्राम के मानेसर और फरुखनगर जैसे इलाके इस नियम से बाहर थे, लेकिन अब पूरे प्रदेश में समान प्रावधान लागू हो गया है।
यह निर्णय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सुनवाई के बाद लिया गया। रोहतक निवासी सुखबीर सिंह ने प्रदेश में पेड़ों की अनियंत्रित कटाई को लेकर एनजीटी में अर्जी दी थी। 9 सितंबर को सुनवाई के बाद एनजीटी ने आदेश दिया कि हरियाणा में कहीं भी पेड़ काटने के लिए वन विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू करते हुए गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों में इस प्रावधान को लागू कर दिया है। इससे पहले केवल कुछ क्षेत्रों में ही अनुमति लेना जरूरी था।

किसानों के लिए छूट:
इस नियम के तहत केवल सात प्रकार के पेड़ों की कटाई बिना अनुमति की जा सकती है – सफेदा, पापुलर, उल्लू नीम, बकायन, बांस, अमरूद और शहतूत। यह छूट लंबे समय से किसानों को दी गई थी।
प्रो. केके यादव, अध्यक्ष कृष्णा अरावली फाउंडेशन और सेवानिवृत मुख्य नगर योजनाकार, का कहना है:
गुरुग्राम और प्रदेश के पर्यावरण को बेहतर बनाना है तो पेड़ों का संरक्षण करना होगा। पौधे लगाना जरूरी है, लेकिन मौजूदा पेड़ों को बचाने पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा। नहीं तो आने वाले समय में सांस लेना मुश्किल हो जाएगा।
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