दीवाली से पहले ही शहर की हवा जहरीली हो चुकी है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 267 तक पहुंच गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि दीवाली पर होने वाली आतिशबाजी के बाद यह 400 से ऊपर जा सकता है, यानी हवा “गंभीर” स्तर तक जहरीली हो जाएगी।

इस समय PM 2.5 और PM 10 जैसी सूक्ष्म कणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इसके कारण लोग आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी, सिर दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बुजुर्ग, बच्चे और अस्थमा के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
प्रदूषण की वजहें
- शहर की टूटी और धूल उड़ाने वाली सड़कें, जिनकी मरम्मत लंबा समय से नहीं हुई।
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों की अनदेखी।
- ट्रैफिक जाम में फंसे वाहनों से धुएं का उत्सर्जन दोगुना।
- कूड़ा जलाने की घटनाएं भी हवा को जहरीला बना रही हैं।
ट्रैफिक जाम और हाईवे का असर
राजीव चौक, सुभाष चौक, इफको चौक, ओल्ड और न्यू रेलवे रोड, बसई रोड और पटौदी रोड पर लंबी वाहनों की कतारें आम हैं। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर पीक आवर में वाहन रेंगते हैं, जिससे कार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड हवा में मिलकर जहरीली धुंध बढ़ा रहे हैं।
स्मॉग क्या है?
स्मॉग = स्मोक (धुआं) + फॉग (कोहरा)।
धुआं और कोहरे के कण मिलकर घना प्रदूषित कोहरा बनाते हैं। ठंड और धीमी हवा के कारण ये कण वातावरण में फंस जाते हैं। स्मॉग से सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।
GRAP-1 के तहत जरूरी उपाय
- धूल उड़ाने वाली गतिविधियों से बचें।
- कचरा न जलाएं।
- सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करें।
- 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण प्लॉट पंजीकृत करवाएँ और धूल नियंत्रण करें।
- निगम क्षेत्र में कचरे का समय पर उठान, मैकेनाइज्ड स्वीपिंग और पानी का छिड़काव।
- तंदूर में कोयला और लकड़ी का इस्तेमाल बंद।
विशेषज्ञ चेतावनी:
“अगर प्रशासन और नागरिक सतर्क न रहें, तो दीवाली के बाद गुरुग्राम की हवा गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। अभी सावधानी बरतना जरूरी है।”
