गुरुग्राम शहर में प्रस्तावित ग्रेटर सदर्न पेरिफेरल रोड (Greater SPR) के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस परियोजना के तहत 14 गांवों की लगभग 670 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) अगले एक सप्ताह के भीतर मुआवजे की घोषणा कर जमीन अपने कब्जे में लेने की तैयारी में है।

इस पूरे अधिग्रहण के लिए सरकार द्वारा करीब 6000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस सड़क परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण दो चरणों में किया जा रहा है।
पहले चरण में इन गांवों की जमीन
पहले चरण में करीब 276 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसमें शामिल गांव हैं:
- बहरामपुर – 26.38 एकड़
- उल्लावास – 17.18 एकड़
- कादरपुर – 76.93 एकड़
- मैदावास – 49.77 एकड़
- धुमसपुर – 54.48 एकड़
- बादशाहपुर – 51.68 एकड़
हाल ही में एचएसवीपी प्रशासक वैशाली सिंह की अध्यक्षता में रेट निर्धारण समिति की बैठक हुई थी। सूत्रों के अनुसार इन गांवों के जमीन मालिकों को करीब 6.5 करोड़ से 8 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक मुआवजा मिल सकता है।
दूसरे चरण में 394 एकड़ जमीन का अधिग्रहण
दूसरे चरण में 8 गांवों की 394 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इनमें शामिल हैं:
- अकलीमपुर – 5.95 एकड़
- टीकली – 62.95 एकड़
- सकतपुर – 68.60 एकड़
- शिकोहपुर – 15.92 एकड़
- नौरंगपुर – 48.41 एकड़
- बार गुर्जर – 99.13 एकड़
- मानेसर – 33.15 एकड़
- नैनवाल – 59.92 एकड़
इन गांवों के लिए 19 मार्च को रेट निर्धारण समिति की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें मुआवजे की दर तय की जाएगी।
शिकोहपुर में मिल सकता है सबसे ज्यादा मुआवजा
सूत्रों के अनुसार दूसरे चरण के गांवों में जमीन मालिकों को 8 करोड़ से 11 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक मुआवजा मिलने की संभावना है। इनमें शिकोहपुर गांव की जमीन का मुआवजा सबसे अधिक हो सकता है।
2013 से चल रहा था मामला
इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का धारा 4 के तहत नोटिस 31 दिसंबर 2013 को जारी किया गया था। इसके बाद जमीन मालिकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत ने स्टे लगा दिया था। करीब 12 साल तक मामला कोर्ट में लंबित रहा।
पिछले साल नवंबर में अदालत ने हरियाणा सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
इस आधार पर तय होगा मुआवजा
जमीन मालिकों को मिलने वाला मुआवजा तीन आधारों पर तय किया जाएगा:
- वर्ष 2011 से 2013 के बीच हुई सबसे महंगी जमीन रजिस्ट्री
- गांवों में हुई रजिस्ट्रियों का औसत बाजार मूल्य
- वर्ष 2013 का कलेक्टर रेट
इनमें से जो दर अधिक होगी, उसी के आधार पर मुआवजा तय किया जाएगा
