6 करोड़ का सफाई टेंडर या सिर्फ कागजों का खेल? GPS ने खोल दी पोल!

आखिर गुरुग्राम की सड़कों से धूल कम क्यों नहीं हो रही? सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, मशीनें भी तैनात हैं, लेकिन जब इनकी लोकेशन और कामकाज की जांच हुई तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। कहीं मशीनें घंटों खड़ी रहीं तो कहीं पूरे दिन उनका सफर जीरो किलोमीटर दर्ज हुआ। हैरानी की बात यह है कि शहर में 20 रोड स्वीपिंग मशीनें तैनात होने के बावजूद ज्यादातर मशीनें सड़कों से गायब हैं।

दरअसल, मिलेनियम सिटी में सड़कों की सफाई के लिए नगर निगम की ओर से रोड स्वीपिंग मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों की निगरानी के लिए GPS ट्रैकिंग की जाती है। 27 से 30 अक्टूबर के बीच सेक्टर-47 और मालिबू टाउन इलाके की GPS रिपोर्ट खंगाली गई तो मशीनों के संचालन में बड़ी लापरवाही सामने आई।

कहीं दो ट्रिप तो कहीं पूरा दिन जीरो किलोमीटर!
रिपोर्ट के अनुसार, 27 अक्टूबर की शाम 5 बजे से 28 अक्टूबर की सुबह 7 बजे तक चार वाहनों की ट्रैकिंग की गई। इनमें एक मशीन ने करीब 32 मिनट में 6 किलोमीटर की दूरी तय कर दो ट्रिप पूरे किए। दूसरी मशीन ने 29 मिनट में 5.8 किलोमीटर का सफर तय किया, जबकि तीसरी ने 51 मिनट में 6.1 किलोमीटर की दूरी तय कर दो ट्रिप दर्ज किए। लेकिन चौथी मशीन की कोई आवाजाही रिकॉर्ड नहीं हुई। हैरानी तो तब हुई जब 28 अक्टूबर को इन चारों मशीनों का मूवमेंट पूरी तरह शून्य रहा। यानी पूरे दिन ये मशीनें एक इंच भी नहीं चलीं।

16 में से 12 मशीनें पार्किंग में खड़ी मिलीं
29 अक्टूबर की शाम 5 बजे से 30 अक्टूबर की सुबह 7 बजे तक की नाइट शिफ्ट में 16 वाहनों की GPS निगरानी की गई। इसमें 12 मशीनें पूरी तरह खड़ी मिलीं। वहीं, एक मशीन ने 40.8 किलोमीटर की दूरी तय कर चार ट्रिप पूरे किए, जबकि दूसरी ने 37.2 किलोमीटर का सफर तय कर सात ट्रिप दर्ज किए। दो अन्य मशीनों ने भी कुछ दूरी तय की, लेकिन बाकी 12 वाहनों का कुल सफर जीरो किलोमीटर रहा।

टेंडर में 30 किलोमीटर रोजाना सफाई की शर्त, फिर भी सड़कों पर मशीनें गायब!
सबसे बड़ा सवाल टेंडर की शर्तों को लेकर खड़ा हो रहा है। नियमों के मुताबिक प्रत्येक रोड स्वीपिंग मशीन को रोजाना कम से कम 30 किलोमीटर सड़क की सफाई करनी अनिवार्य है। नगर निगम ने मैकेनिकल स्वीपिंग के लिए शहर की 404.6 किलोमीटर सड़कें चिन्हित की हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में केवल करीब 30 प्रतिशत सड़कों पर ही मशीनों की सफाई का असर दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जो मशीनें चल रही थीं, उनमें से भी कई सेक्टर-47 और मालिबू टाउन जैसे सीमित इलाकों तक ही सीमित रहीं। पिछले एक महीने से अधिकांश मशीनों के सड़कों पर नहीं दिखने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

6 करोड़ का टेंडर, फिर मॉनिटरिंग में इतनी बड़ी चूक क्यों?
सफाई व्यवस्था के रखरखाव पर करीब 6 करोड़ रुपये का भारी-भरकम टेंडर होने के बावजूद मशीनों का इस तरह खड़े रहना नगर निगम की निगरानी व्यवस्था और ठेका लेने वाली एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। जब मशीनें सड़कों पर चल ही नहीं रही हैं तो धूल पर नियंत्रण कैसे होगा? और जब रोजाना 30 किलोमीटर सफाई की शर्त है तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है?

इस मामले में नगर निगम की ओर से आश्वासन दिया गया है कि सभी रोड स्वीपिंग मशीनों को टेंडर की शर्तों के अनुसार चलवाया जाएगा। मशीनों में आ रही दिक्कतों का पता लगाया जाएगा और जल्द ही सभी गाड़ियां निर्धारित रूटों पर चलती दिखाई देंगी। अब देखना होगा कि नगर निगम का यह आश्वासन जमीन पर कब उतरता है और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद धूल से परेशान गुरुग्राम के लोगों को आखिर कब राहत मिलती है।

More From Author

बिल्डरों की मनमानी पर कब लगेगी लगाम? 13 को नोटिस, अब सीलिंग की तैयारी!

गुरुग्राम में फॉगिंग का महाअभियान! क्या हर गली तक पहुंचेगी निगम की टीम?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *