गुरुग्राम साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े व्हाट्सऐप फ्रॉड मामले का खुलासा करते हुए दो नाइजीरियाई नागरिकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों आरोपी खुद को कंपनियों का निदेशक बताकर कर्मचारियों को धोखा देते थे और उनसे बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओजो उयोइसा और जेम्स के रूप में की है। ये गिरफ्तारियां शनिवार को नाथूपुर के एस-ब्लॉक इलाके से की गईं। साइबर क्राइम पुलिस (पूर्व), गुरुग्राम ने संदिग्ध फोन नंबरों के तकनीकी विश्लेषण के बाद यह कार्रवाई की।
छात्र वीजा और पर्यटक वीजा पर आए थे भारत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ओजो उयोइसा वर्ष 2014 में छात्र वीजा पर भारत आया था, जबकि जेम्स 2023 में पर्यटक वीजा पर देश में दाखिल हुआ था। दोनों आरोपी अन्य नाइजीरियाई नागरिकों के साथ मिलकर इस ठगी गिरोह को संचालित कर रहे थे।
व्हाट्सऐप पर डायरेक्टर बनकर करते थे संपर्क
जांच में सामने आया है कि आरोपी व्हाट्सऐप के जरिए कंपनियों के कर्मचारियों से संपर्क करते थे और खुद को कंपनी का निदेशक या सीनियर अधिकारी बताकर तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते थे। ठगी से प्राप्त रकम को बाद में गिरोह के सदस्यों में बांट लिया जाता था।
10 लाख रुपये की ठगी, बैंक खाता पहले से संदिग्ध
पुलिस का दावा है कि इस धोखाधड़ी के जरिए करीब 10 लाख रुपये एक बंधन बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए थे। खास बात यह है कि उसी बैंक खाते के खिलाफ पहले से ही दो साइबर क्राइम शिकायतें दर्ज थीं।
मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जा रहा था। पूछताछ और सबूतों के आधार पर यह भी सामने आया है कि आरोपी इसी तरह की कई साइबर धोखाधड़ी की वारदातों में शामिल रहे हैं।
तीन दिन की पुलिस हिरासत
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें रविवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान, आगे की बरामदगी और ठगी की कुल रकम का पता लगाने में जुटी हुई है।
