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सेक्टर-70A में पानी बना ज़हर! 70 लोग बीमार, जांच में बड़ा खुलासा

गुरुग्राम के सेक्टर-70A स्थित बीपीटीपी एस्टेयर गार्डन सोसायटी में सप्लाई किया जा रहा पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को जांच के बाद यह खुलासा किया। बीते एक हफ्ते में सोसायटी के 60 से 70 निवासियों को दस्त, पेट में संक्रमण और लगातार उल्टी की शिकायत हुई थी, जिसके बाद पानी की जांच कराई गई।

12 दिसंबर को पालरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने सोसायटी के कई फ्लैटों से पानी के नमूने लिए। जांच रिपोर्ट में प्रति 100 मिलीलीटर पानी में 7 कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए, जो गंभीर जल-संदूषण की ओर इशारा करता है। स्वास्थ्य मानकों के मुताबिक पीने के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया एक भी नहीं होना चाहिए।

पानी की सप्लाई बंद, फिर आए टैंकर

निवासियों का कहना है कि 3 और 4 दिसंबर को GMDA ने पानी की सप्लाई बंद कर दी थी। इसके बाद बिल्डर ने सोसायटी में टैंकरों से पानी मंगवाया। आरोप है कि इसी पानी के इस्तेमाल के बाद लोगों की तबीयत खराब होने लगी।

आरडब्ल्यूए के महासचिव अरुणी शुक्ला ने कहा कि कई परिवारों में एक साथ लोग बीमार पड़े, जिससे पानी की गुणवत्ता पर शक गहराया।

GMDA ने पल्ला झाड़ा

GMDA ने अपने स्तर पर लिए गए पानी के नमूनों को साफ और पीने योग्य बताया है। GMDA के कार्यकारी अभियंता अभिनव वर्मा के अनुसार, 11 दिसंबर को इनलेट से लिए गए सैंपल पूरी तरह ठीक पाए गए। उन्होंने कहा कि यदि GMDA की सप्लाई दूषित होती, तो आसपास की अन्य सोसायटियों से भी शिकायतें आतीं।
हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि 3 और 4 दिसंबर को पानी की सप्लाई बंद रही थी।

स्वास्थ्य शिविर में सामने आए दस्त के मामले

13 दिसंबर को राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सोसायटी में स्वास्थ्य शिविर लगाया, जहां दस्त के कई मरीज सामने आए। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. जय प्रकाश राजलीवाल ने बताया कि पानी में मौजूद कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पेट के संक्रमण और दस्त का बड़ा कारण हो सकता है। निवासियों को अपने अंडरग्राउंड और ओवरहेड टैंकों की सफाई कराने की सलाह दी गई।

बिल्डर ने जिम्मेदारी से किया इनकार

बिल्डर का पक्ष रखते हुए BPMS के एमडी श्याम सुंदर ने कहा कि खराब रिपोर्ट व्यक्तिगत फ्लैटों के टैंकों से लिए गए नमूनों की है, जिनकी सफाई फ्लैट मालिकों की जिम्मेदारी होती है। उनके मुताबिक, स्रोत स्तर पर पानी की जांच में कोई समस्या नहीं मिली और टैंकरों के पानी की नियमित जांच की जाती है।

अधिकारीयों तक जाएंगे निवासी

निवासियों ने साफ कहा है कि वे इस मामले को जिला उपायुक्त और उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे। उनकी मांग है कि दूषित पानी की सप्लाई की स्वतंत्र जांच हो और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।










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