गुरुग्राम। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत वंचित बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करने पर गुरुग्राम के कई नामी निजी स्कूलों पर शिकंजा कस गया है।
शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जवाब मिलने के बाद विभाग ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई का इंतज़ार है।

529 स्कूलों में सिर्फ 92 बच्चों को मिला दाखिला
जिले में कुल 529 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं। विभाग और मुख्यालय की संयुक्त टीम ने हाल ही में इन स्कूलों का निरीक्षण किया था।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वंचित वर्ग के 470 बच्चों के लिए आरटीई की सीटें निर्धारित थीं, लेकिन दाखिला मिला सिर्फ 92 छात्रों को।
बाकी बच्चे और अभिभावक महीनों से स्कूलों और विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन दाखिले अब तक अधर में लटके हैं।
400 से ज़्यादा आवेदन, 199 की फाइलें अब भी अटकीं
खंड शिक्षा अधिकारी सुदेश राघव के मुताबिक इस सत्र में करीब 400 बच्चों ने आरटीई के तहत आवेदन किया था।
इनमें से 199 आवेदनों का सत्यापन तक नहीं हुआ, जबकि 179 आवेदन सीधे खारिज कर दिए गए।
अब विभाग ने सभी ऐसे स्कूलों की सूची बनाकर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है।
आरटीई की अनदेखी पर होगी कार्रवाई
आरटीई अधिनियम के तहत हर निजी स्कूल को 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं।
लेकिन कई स्कूल इस नियम की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अगर स्कूलों ने अब भी दाखिले नहीं किए, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
अभिभावकों में रोष, बच्चे अब भी इंतज़ार में
कई अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन जानबूझकर दाखिले टाल रहे हैं। कुछ मामलों में दस्तावेज़ों की कमी का हवाला देकर बच्चों के आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि विभाग को अब सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
