गुरुग्राम जिले में प्रेम संबंधों की जिद ने एक युवक को अपराध की राह पर धकेल दिया। सेक्टर- 43 स्थित वन होराइजन सेंटर में एक निजी कंपनी के ऑफिस की बम से उड़ाने की झूठी सूचना देकर गिरफ्तार किए गए आरोपी अनिकेत पॉल ने यह कदम अपनी पूर्व प्रेमिका के जांच इंटरव्यू को टालने के लिए उठाया।

पुलिस ने मामले की जांच में चौकाने वाले खुलासे किए हैं। घटना की शुरुआत कल सुबह 9 बजकर 10 मिनट के आसपास हुई, जब कंपनी को ईमेल के जरिए बम की धमकी मिली। सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया।
तलाशी में कुछ नहीं मिला
सहायक पुलिस आयुक्त एसीपी विकास कौशिक के नेतृत्व में डीएलएफ थाना साइबर पूर्व की टीम. बम निरोधक दस्ता और अन्य सुरक्षा बल तुरंत मौके पर पहुंचे। परिसर को खाली करवाया गया और कई घंटो तक सघन तलाशी अभियान चला।
स्निफर डॉग्स और विशेष उपकरणों की मदद से पूरे ऑफिस की जांच की गई। लेकिन कहीं कोई विस्फोटक सामग्री या संदिग्ध वस्तु नहीं निली। जांच के बाद पुष्टि हुई कि यह पूरी तरह फर्जी और होक्स मेल थी।

बंगाल का रहने वाला आरोपी
पुलिस ने साइबर ट्रेसिंग औऱ तकनीकी जांच के जरिए आरोपी तक पहुंच बनाई। आरोपी अनिकेत पॉल उम्र 29 वर्ष मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। वह लंदन के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज से पढ़ाई कर चुका है। और एलएलएम की डिग्री हासिल की है।

इंटरव्यू टालने के लिए मेल किया
अनिकेत ने सोचा कि अगर लड़की का इंटरव्यू स्थगित या रद्द हो जाएगा, तो वह परेशान होकर संपर्क करेगी और रिश्ता सुधारनें का मौका मिलेगा। इसी सोच के तहत उसने कंपनी के ऑफिस को टारगेट कर बम की झूठी सूचना ईमेल से भेजी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। एसीपी विकास कौशिक ने डीएलएफ स्थित अपने कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी घटना की जानकारी दी।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
उन्होंने बताया कि आरोपी पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही आईटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं। एसीपी ने कहा कि ऐसी हरकतें न केवल सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करती हैं, बल्कि पूरे शहर में दहशत फैलाती है। जांच में पता चला कि ईमेल किसी प्रॉक्सी या फेक आईडी से भैजा गया था, लेकिन तकनीकि सबूतों से आरोपी तक पहुंच बनाई गई।
उन्होंने आमजन से अपील की है कि प्रेम संबंधों या व्यक्तिगत विवादों में कानून का सहारा ले, न कि अपराध ऐसी झूठी धमकियां गंभीर अपराध हैं, जिनमें 7 साल तक की सजा हो सकती है।
