गुरुग्राम में हर गर्मी पानी को लेकर मचने वाली हाहाकार के बीच बड़ी राहत की खबर आई है। सोनीपत के ककरोई से बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक आने वाली गुरुग्राम नहर को पूरी तरह नए सिरे से बनाया जाएगा। करीब 1989 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना का टेंडर अगले महीने जारी होने की तैयारी है।

अगर योजना समय पर पूरी हुई तो 2028 के अंत तक शहर की पेयजल व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
क्यों जरूरी है नई नहर?
करीब 70 किलोमीटर लंबी यह नहर इस समय जर्जर हालत में है।
- अभी इसमें सिर्फ 100–110 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है
- कई जगहों पर लीकेज और अवैध पाइपलाइन की शिकायतें
- पानी चोरी की घटनाएं
नई योजना के तहत पूरी नहर में पाइप डाले जाएंगे, जिससे इसकी क्षमता बढ़कर 653 क्यूसेक हो जाएगी।
बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को अकेले 231 क्यूसेक पानी दिया जाएगा।
किन इलाकों को होगा सीधा फायदा?
इस परियोजना से सिर्फ गुरुग्राम ही नहीं, बल्कि
- फर्रुखनगर
- पटौदी
- हेलीमंडी
- सोहना
- झज्जर
क्षेत्रों में भी पानी की सप्लाई बेहतर होगी।
गौरतलब है कि शहर की लगभग 30 लाख आबादी अब लगभग पूरी तरह नहरी पानी पर निर्भर है, क्योंकि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।
जीएमडीए से मांगे 702 करोड़
गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) से सिंचाई विभाग ने इस परियोजना के लिए 702 करोड़ रुपये देने का अनुरोध किया है।
अधिकारियों का दावा है कि निर्माण कार्य 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा।
निर्माण के दौरान कैसे मिलेगी सप्लाई?
नहर निर्माण के समय पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं होगी।
फिलहाल शहर में कुल 245 क्यूसेक पानी आ रहा है:
- 110 क्यूसेक गुरुग्राम नहर से
- 135 क्यूसेक एनसीआर नहर से
निर्माण अवधि में एनसीआर नहर से सप्लाई जारी रखी जाएगी।
सेक्टर-58 से 80 तक हर साल क्यों होती है किल्लत?
गर्मियों में सबसे ज्यादा संकट सेक्टर-58 से सेक्टर-80 तक देखने को मिलता है। नई नहर बनने के बाद इन इलाकों में प्रेशर और सप्लाई दोनों में सुधार की उम्मीद है।
अधिकारी क्या कहते हैं?
जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता अभिनव वर्मा के अनुसार,
“नहर के नए सिरे से निर्माण के बाद शहर की पेयजल व्यवस्था में स्थायी सुधार आएगा।”
