हर दिन हजारों गैलन गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के फरीदाबाद के गौंछी नाले से सीधे गुरुग्राम नहर में मिल रहा है। स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता इसे एनजीटी नियमों का खुला उल्लंघन बता रहे हैं।

स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि इस दूषित पानी से नहर का जल और भूजल जहरीला होने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर यह पानी फसलों की सिंचाई में इस्तेमाल हुआ, तो गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
नहर और भूजल पर गंभीर खतरा
गौंछी नाला, जो फरीदाबाद से गुरुग्राम तक लगभग 10 किलोमीटर लंबा है, पहले केवल बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाया गया था।
लेकिन अब इसमें शहर के सेक्टर और कॉलोनियों की सीवर लाइनें भी जोड़ दी गई हैं, जिससे हर दिन हजारों गैलन गंदा पानी नहर में जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो पलवल के छांयसा गांव जैसी गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्याएं गुरुग्राम में भी हो सकती हैं।
एसटीपी योजना बनी केवल कागजों में
प्रशासन ने इस नाले के पानी को शोधित करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ने की योजना बनाई थी।
- योजना का बजट करोड़ों रुपये का था।
- इस पर लंबी चर्चा और प्रक्रिया हुई, लेकिन धरातल पर एक ईंट भी नहीं रखी गई।
अधिकारियों की सुस्ती और लापरवाही के कारण यह योजना पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। नतीजा यह है कि हर दिन दूषित पानी नहर और आसपास के भूजल में मिल रहा है, जिससे सिंचाई और पीने के पानी के स्रोत खतरे में हैं।
नियमों की खुलेआम अनदेखी
एनजीटी के निर्देश स्पष्ट हैं कि किसी भी प्राकृतिक जल स्रोत या नहर में बिना ट्रीट किए सीवेज का पानी नहीं छोड़ा जा सकता।
पर्यावरण कार्यकर्ता सुनील हर्षना ने कहा, “संबंधित विभाग केवल नोटिस जारी करने या जुर्माना भरने तक सीमित हैं। वास्तविक समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।”
नाला और नहर का रूट
गौंछी नाला, सरूरपुर के पास प्रतापगढ़ से मादलपुर तक, बुढ़िया नाले में जाकर गुरुग्राम नहर से जुड़ता है।
स्थानीय कॉलोनियों और सेक्टरों की सीवर लाइनें इसमें जोड़ने से यह नाला अब सिर्फ बरसाती पानी नहीं, बल्कि साफ नहर को दूषित करने वाला मुख्य स्रोत बन गया है।
भविष्य की चेतावनी
स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्दी कार्रवाई नहीं की, तो न केवल गुरुग्राम नहर और भूजल दूषित होंगे, बल्कि फसलों और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में देर होने पर जहरीला पानी फसलों और कृषि भूमि में पहुंचकर गंभीर रोग फैला सकता है, जिससे पूरे इलाके में स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।
