गुरुग्राम के बहुप्रतीक्षित सेक्टर-56 से पचगांव मेट्रो कॉरिडोर पर अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है। करीब 10,428 करोड़ रुपये की इस परियोजना की रफ्तार जमीन के मुआवजे को लेकर विभागों के बीच फंसी हुई है, जिससे इसके निर्माण में देरी की आशंका बढ़ गई है।

दरअसल, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग आमने-सामने आ गए हैं। मामला अब राज्य के मुख्य सचिव तक पहुंचने वाला है, जहां इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (HMRTC) ने RITES लिमिटेड से तैयार DPR को मंजूरी के लिए HSIIDC को भेजा था। जवाब में HSIIDC ने साफ कहा—अगर उनकी जमीन पर मेट्रो स्टेशन बनाना है, तो उसका मुआवजा दिया जाए।
वहीं, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग का तर्क बिल्कुल उल्टा है। उनका कहना है कि मेट्रो जैसी मेगा परियोजनाओं के लिए सरकारी जमीन फ्री में दी जाती है। अगर मुआवजा दिया गया, तो प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी और इसका सीधा बोझ हरियाणा सरकार पर पड़ेगा।
DMRC का उदाहरण क्यों दिया जा रहा है?
विभाग ने दिल्ली मेट्रो का हवाला देते हुए कहा कि वहां DDA, NDMC या नगर निगमों को जमीन के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया था। ऐसे में HSIIDC को मुआवजा देना संभव नहीं है।
कितना बड़ा है प्रोजेक्ट?
- कुल लागत: ₹10,428 करोड़
- केंद्र सरकार की हिस्सेदारी: 10%
- हरियाणा सरकार: 90% खर्च उठाएगी
- HSIIDC का योगदान: करीब ₹1500 करोड़
36 KM लंबा कॉरिडोर, 28 स्टेशन
यह मेट्रो लाइन सेक्टर-56 से शुरू होकर गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और SPR के रास्ते पचगांव तक जाएगी। पूरे रूट पर 28 स्टेशन बनाए जाने हैं।
प्रमुख स्टेशन होंगे:
सेक्टर-56, घाटा चौक, सेक्टर-61/62, सेक्टर-66, वाटिका चौक, सेक्टर-69, 70, 75, खेड़की दौला, सेक्टर-36A, ग्लोबल सिटी, सेक्टर-88, 84, 85, 89, 90, 91, कांकरेला गांव और आखिर में पचगांव।
पहले ही हो चुका है सर्वे
इस प्रोजेक्ट के लिए 2024 में सोशल और एनवायरनमेंटल स्टडी पूरी हो चुकी है, लेकिन अब जमीन का विवाद इसकी टाइमलाइन बिगाड़ सकता है।
क्यों अहम है ये मेट्रो?
यह कॉरिडोर गुरुग्राम के सबसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों—गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और न्यू सेक्टरों—को कनेक्ट करेगा। देरी का मतलब लाखों लोगों के लिए ट्रैफिक से राहत का सपना टलना।
