वाहन कम मिले, GPS भी गायब… गुरुग्राम में 2 सफाई एजेंसियों पर 31.45 लाख का जुर्माना

गुरुग्राम में सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने अब एजेंसियों की जवाबदेही तय करनी शुरू कर दी है। निगम की जांच में सामने आया कि जिन एजेंसियों को सफाई के लिए तय संख्या में वाहन और कर्मचारी मैदान में उतारने थे, वहां कई स्तर पर लापरवाही बरती जा रही थी।

कहीं वाहनों का SWM मॉनिटरिंग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं था, कहीं तय संख्या से कम वाहन सड़क पर मिले, तो कहीं कर्मचारियों की ऑनलाइन हाजिरी और वाहनों का GPS रिकॉर्ड ही अधूरा मिला।

जांच के बाद नगर निगम ने दो एजेंसियों पर कुल 31 लाख 45 हजार 360 रुपये की पेनल्टी लगाई है। इतना ही नहीं, दोनों एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

10 ट्रैक्टर-ट्रॉली देनी थीं, पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन तक नहीं

जोन-6 में सैनिटेशन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध कराने का काम केएस मल्टीफेसलिटी सर्विसेज लिमिटेड को दिया गया था।

एजेंसी को 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 10 चालक और 7 हेल्पर उपलब्ध कराने थे। लेकिन निगम की जांच में निर्धारित वाहनों का SWM मॉनिटरिंग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं मिला।

नियमों के मुताबिक प्रति वाहन प्रतिदिन 2,000 रुपये की दर से पेनल्टी लगाई गई। 15 जून से 31 जुलाई की अवधि के लिए एजेंसी पर कुल 9.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

निगम ने एजेंसी को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया है।

दूसरी एजेंसी के मामले में खुली बड़ी लापरवाही

जोन-6 में डोर-टू-डोर कचरा उठाने का काम कर रही द क्लासिक मैनपावर एंड कंस्ट्रक्शन सर्विसेज भी जांच में फंस गई।
इस एजेंसी के जिम्मे 53 वाहन, 53 चालक-हेल्पर और 3 सुपरवाइजर लगाने की जिम्मेदारी थी।

लेकिन निगम की निगरानी में जुलाई के दौरान कई ऐसे दिन सामने आए, जब तय संख्या के मुकाबले कम वाहन ही सड़क पर चलते मिले।

यानी जिस संख्या में वाहन कचरा उठाने के लिए मैदान में होने चाहिए थे, वास्तविक संचालन उससे कम पाया गया।

वाहनों के संचालन, मौके पर किए गए भौतिक सत्यापन और SWM पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड को आधार बनाकर निगम ने एजेंसी पर 20 लाख 49 हजार 641 रुपये की पेनल्टी लगा दी।

GPS भी अधूरा, कर्मचारियों की हाजिरी भी ऑनलाइन नहीं
मामला सिर्फ वाहनों की संख्या तक सीमित नहीं रहा।

जांच में पाया गया कि एजेंसी ने अपने कर्मचारियों का SWM पोर्टल पर पूरा पंजीकरण और एरिया असाइनमेंट भी नहीं किया था। इसके अलावा सभी वाहनों में GPS की व्यवस्था नहीं मिली।

GPS क्रेडेंशियल उपलब्ध कराने में भी कमी पाई गई। वहीं कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति भी पोर्टल पर दर्ज नहीं की जा रही थी।
मैनपावर की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने पर ही 1 लाख 55 हजार 719 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया।
इसके बाद दूसरी एजेंसी पर कुल पेनल्टी बढ़कर 22 लाख 5 हजार 360 रुपये हो गई।

एक महीने का बिल करीब 21 लाख, जुर्माना उससे भी ज्यादा
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू दूसरी एजेंसी से जुड़ा है।
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए एजेंसी का टेंडर के अनुसार करीब 21 लाख रुपये का मासिक बिल बनता है।
लेकिन जुलाई में ही निगम ने इस एजेंसी पर 22.05 लाख रुपये की पेनल्टी लगा दी।

यानी जिस महीने एजेंसी को करीब 21 लाख रुपये का भुगतान मिलना था, उसी महीने उस पर इससे भी ज्यादा रकम का जुर्माना लगा।

अब सिर्फ जुर्माना नहीं, ब्लैकलिस्टिंग की तैयारी
नगर निगम गुरुग्राम के संयुक्त आयुक्त डॉ. प्रीतपाल सिंह ने साफ किया है कि सफाई एजेंसियों को कार्यादेश और RFP में तय सभी शर्तों का पालन करना होगा।

उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी, वाहनों की कम तैनाती, GPS व्यवस्था में लापरवाही या डिजिटल मॉनिटरिंग के नियमों का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड के साथ अन्य अनुबंधीय कार्रवाई भी की जाएगी।

इसी के तहत दोनों एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अब सफाई व्यवस्था की निगरानी कैसे होगी?
नगर निगम की कार्रवाई से साफ है कि अब सफाई एजेंसियों के दावों को सिर्फ कागजों के आधार पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। निगम की निगरानी में मुख्य रूप से—

  • कितने वाहन वास्तव में मैदान में उतरे
  • वाहनों का SWM पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
  • GPS की स्थिति और क्रेडेंशियल
  • कितने कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे
  • कर्मचारियों की ऑनलाइन हाजिरी
  • निर्धारित क्षेत्र में संसाधनों की तैनाती








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