गुरुग्राम के युवराज मनचंदा केस में अब शव के अंतिम संस्कार से जुड़ी पुलिस की कार्रवाई पर ही बड़े सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को गुरुग्राम पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि आखिर अंतिम संस्कार से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन क्यों नहीं किया गया?
मामले की सुनवाई कर रहे JMFC राहुल जैन ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने न तो अज्ञात शव से जुड़ी जांच की जानकारी संबंधित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को दी और न ही शव के पास मिले सामान और विसरा को सुरक्षित रखा।

कहाँ गया शव के साथ मिला सामान ?
सुनवाई के दौरान मृतक की बहन हरसिमरन मनचंदा की ओर से पेश वकील ने बताया कि अंतिम संस्कार वाली जगह से जली हुई घड़ी और कड़ा मिला था। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि शव के साथ मिले सामान को सुरक्षित रखे बिना उसका अंतिम संस्कार कैसे किया जा सकता है? कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि इस मामले में कानून और तय प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।
क्यों नहीं अपलोड की शव की जानकारी
अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि शव मिलने के बाद उसकी जानकारी ZIPNET पर अपलोड क्यों नहीं की गई। ZIPNET एक पुलिस नेटवर्क है, जिसके जरिए दिल्ली, हरियाणा और दूसरे उत्तरी राज्यों में लापता लोगों और अज्ञात शवों की जानकारी साझा की जाती है। जज ने गुरुग्राम पुलिस के अधिकारी से पूछा कि क्या हत्या या दूसरे मामलों में मिले अज्ञात शवों की जानकारी ZIPNET पर अपलोड नहीं की जाती और अगर यह प्रक्रिया होती है, तो इस केस में इसका पालन क्यों नहीं हुआ?
एक नहीं ,दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट
मामले में एक और बड़ा सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर सामने आया। कोर्ट ने कहा कि दो रिपोर्ट में अंतर है। एक रिपोर्ट में गोली लगने से चोट का जिक्र किया गया, जबकि दूसरी रिपोर्ट में मौत की वजह डूबने के कारण दम घुटना बताई गई। कोर्ट ने पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं होने और विसरा सुरक्षित नहीं रखे जाने पर भी सवाल उठाया।
पुलिस अधिकारी रह गए चुप
सुनवाई के दौरान बादशाहपुर थाने के एक पुलिस अधिकारी से भी कोर्ट ने सवाल किए। कोर्ट के मुताबिक, अधिकारी के पास पूछे गए सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं था। जज ने कहा कि शव का अंतिम संस्कार कर दिए जाने के कारण शिकायतकर्ता अपने भाई को आखिरी बार देख भी नहीं पाई। कोर्ट ने यह भी कहा कि परिवार से अपने बेटे का अंतिम संस्कार पूरी श्रद्धा के साथ करने का अधिकार भी छिन गया।
वकील ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक की बहन के वकील प्रसाद ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि पुलिस की कार्रवाई सबूत मिटाने जैसी थी और इसका मकसद आरोपियों को बचाना था। हालांकि, यह वकील की ओर से लगाया गया आरोप है, कोर्ट का निष्कर्ष नहीं। अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि युवराज मनचंदा के शव को संभालने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? कोर्ट ने मामले से जुड़ी याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
