गुरुग्राम में मेट्रो का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक साथ दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है, तो दूसरी तरफ गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे पर 16 लेन का बड़ा टोल प्लाजा बनाने की तैयारी है। यानी आने वाले समय में गुरुग्राम की कनेक्टिविटी का पूरा नक्शा बदलता नजर आ सकता है।

दूसरे चरण के टेंडर को मिली मंजूरी
हरियाणा सरकार ने बुधवार को ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण के टेंडर को मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) अगले सप्ताह टेंडर जारी कर सकता है। दूसरे चरण के निर्माण पर करीब 1,662 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस चरण में सेक्टर-9 से दिल्ली-जयपुर हाईवे पर स्थित डीएलएफ साइबर सिटी तक करीब 15.3 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाना है।
किन इलाकों से होकर गुजरेगी मेट्रो
दूसरे चरण में कुल 14 स्टेशन प्रस्तावित हैं। मेट्रो का रूट सेक्टर-7, सेक्टर-4, सेक्टर-5, रेलवे स्टेशन, अशोक विहार, सेक्टर-3, बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर-23ए, सेक्टर-22, सेक्टर-21, उद्योग विहार फेज-1 होते हुए डीएलएफ साइबर सिटी तक जाएगा। इस रूट की खास बात यह है कि कई ऐसे इलाके मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगे, जहां अभी लोगों को सड़क परिवहन पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है।
ऊपर दौड़ेगी मेट्रो और नीचे होगा फ्लाईओवर
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण में कुछ हिस्सों में डबल डेकर मेट्रो कॉरिडोर भी बनाया जाएगा। सेक्टर-5 से शीतला माता रोड की तरफ अंडरपास का प्रावधान है। वहीं बजघेड़ा रोड और सुशील ऐमा मार्ग से ओल्ड दिल्ली रोड की तरफ डबल डेकर कॉरिडोर बनाया जाना है। इसमें ऊपर मेट्रो और नीचे फ्लाईओवर की व्यवस्था होगी। इससे उन इलाकों में सड़क और मेट्रो दोनों के लिए जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
कितने किलोमीटर लंबा होगा प्रोजेक्ट ?
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के तहत कुल 30.5 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाना है। इसमें कुल 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक करीब 15.2 किलोमीटर का कॉरिडोर बनाया जा रहा है।
पहले चरण की रफ्तार पर उठ रहे सवाल
जहां दूसरे चरण के टेंडर को मंजूरी मिलने से मेट्रो प्रोजेक्ट को गति मिलने की उम्मीद है, वहीं पहले चरण की धीमी रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। पहले चरण का काम पिछले साल अगस्त में दो कंपनियों को दिया गया था। इन्हें करीब दो साल में 15.221 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण करना है। लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अभी तक करीब 14 से 15 प्रतिशत ही काम पूरा हुआ है। खास बात यह है कि अभी तक किसी भी मेट्रो स्टेशन की मुख्य इमारत का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। अब सवाल यही है कि जब पहले चरण का काम अपेक्षाकृत धीमी गति से चल रहा है, तो दूसरे चरण का काम किस रफ्तार से आगे बढ़ेगा?
दिल्ली जाने वालों को क्या फायदा होगा?
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो का पूरा नेटवर्क तैयार होने के बाद दिल्ली और गुरुग्राम के बीच सफर आसान होने की उम्मीद है। खासकर उद्योग विहार, साइबर पार्क, एसईजेड और डीएलएफ साइबर सिटी जैसे बड़े रोजगार केंद्रों तक पहुंचने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। अभी कई यात्रियों को मिलेनियम सिटी सेंटर जैसे मेट्रो स्टेशन पर उतरने के बाद ऑटो या ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ता है। पूरा कॉरिडोर बनने के बाद मेट्रो नेटवर्क के जरिए इन इलाकों तक सीधे पहुंचना आसान हो जाएगा।
