गुरुग्राम में प्रदूषण फैलाने वालों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने लगा है। जिन बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स में करोड़ों रुपये का निर्माण कार्य चल रहा है, उन्हें अब अपना काम रोकना पड़ सकता है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने पर 13 बिल्डरों को निर्माण कार्य बंद करने के नोटिस जारी किए हैं। इनमें कई बड़े बिल्डरों के नाम भी शामिल हैं। सवाल यह है कि आखिर इन निर्माण स्थलों पर ऐसा क्या हो रहा था, जिसकी वजह से बोर्ड को इतनी सख्त कार्रवाई करनी पड़ी?
दरअसल, शहर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निर्माण स्थलों की निगरानी तेज कर दी है। इससे पहले बोर्ड की ओर से नियमों का उल्लंघन करने वाली 20 से अधिक निर्माण साइटों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। बिल्डरों से जवाब मांगा गया, लेकिन जिनके स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए गए, उनके खिलाफ अब कार्रवाई की गई है।

कैमरे बंद, धूल नियंत्रण के इंतजाम भी सवालों के घेरे में
बोर्ड की जांच में कुछ निर्माण स्थलों पर निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे बंद मिले। वहीं, कई जगह निर्धारित पर्यावरण नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। दरअसल, निर्माण स्थलों पर उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करना अनिवार्य है। इसके लिए पानी का छिड़काव, धूल रोकने के इंतजाम और निगरानी व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।
नियमों के मुताबिक 500 वर्ग मीटर से बड़ी सभी निर्माण साइटों का डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। कैमरे बंद होने की स्थिति में अधिकारियों के लिए यह निगरानी करना मुश्किल हो जाता है कि निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण के उपाय वास्तव में किए जा रहे हैं या नहीं।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी हरिश शर्मा के अनुसार, प्रदूषण फैलाने वालों और ग्रैप के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में 13 निर्माणकर्ताओं को काम बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं।
अब सील भी हो सकती हैं निर्माण साइटें
बोर्ड अब उन बिल्डरों की सूची भी तैयार कर रहा है, जिन्होंने 500 वर्ग मीटर से बड़ी निर्माण साइट होने के बावजूद डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया है। ऐसे बिल्डरों को पहले नोटिस देकर पंजीकरण कराने और धूल नियंत्रण के जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी जारी रही तो निर्माण स्थल को सील करने सहित अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
क्या है डस्ट पोर्टल?
डस्ट पोर्टल एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए 500 वर्ग मीटर से बड़ी निर्माण साइटों का पंजीकरण किया जाता है। इस पर बिल्डरों को निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण के उपायों और निगरानी व्यवस्था की जानकारी देनी होती है। इसका उद्देश्य निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर नजर रखना और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है।
बारिश के बाद फिर बिगड़ी गुरुग्राम की हवा
इधर, गुरुग्राम की हवा भी एक बार फिर खराब होने लगी है। हाल ही में हुई बारिश से प्रदूषण के स्तर में राहत मिली थी, लेकिन मौसम साफ होते ही एक्यूआई में तेजी से उछाल देखने को मिला। रविवार को गुरुग्राम का एक्यूआई 183 दर्ज किया गया, जबकि शनिवार को यह घटकर 88 रह गया था। वहीं मानेसर का एक्यूआई भी 58 से बढ़कर 166 पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड बढ़ने और हवा की रफ्तार कम होने के साथ प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है।
