गुरुग्राम। एक साधारण किराए के फ्लैट में बैठकर देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का नेटवर्क चलाया जा रहा था। बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लगता था, लेकिन अंदर चल रहा खेल बेहद शातिर था। गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर लोगों को निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये ठग रहे थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी जनक, रेवाड़ी निवासी दिनेश कुमार और फतेहाबाद निवासी पवन कुमार के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित एक किराए के फ्लैट से अपना पूरा ऑपरेशन चला रहा था।
2.53 करोड़ की ठगी ने खोला पूरा राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब गुरुग्राम के एक व्यक्ति ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि निवेश के नाम पर उससे 2.53 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम में से 15 लाख रुपये एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बैंक खाते में भेजे गए थे। जब उस खाते की गहराई से पड़ताल की गई तो कई मोबाइल नंबर सामने आए। इन्हीं मोबाइल नंबरों की लोकेशन ने पुलिस को सीधे दिल्ली पहुंचा दिया।
मोबाइल लोकेशन बनी सबसे बड़ा सुराग
साइबर पुलिस ने तकनीकी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए एक मोबाइल नंबर को ट्रेस किया, जो लगातार दिल्ली में सक्रिय था। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने दिलशाद गार्डन में दबिश दी और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि आरोपी केवल छोटे-मोटे फ्रॉड नहीं कर रहे थे, बल्कि संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।
फ्लैट से मिला साइबर ठगी का पूरा जखीरा
जब पुलिस ने फ्लैट की तलाशी ली तो वहां से बरामद सामान देखकर टीम भी हैरान रह गई। मौके से 25 पासपोर्ट, 53 ATM कार्ड, 5 चेकबुक, 36 मोबाइल फोन और 2 आईपी कैमरे बरामद किए गए।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इन दस्तावेजों और उपकरणों का इस्तेमाल बैंक खातों के संचालन, रकम ट्रांसफर करने और साइबर फ्रॉड नेटवर्क को मैनेज करने में किया जा रहा था।
दुबई कनेक्शन की भी जांच
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पवन कुमार कुछ समय पहले दुबई में रह चुका है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उसने विदेश में रहकर साइबर अपराध के तरीके सीखे थे और क्या इस पूरे नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से भी जुड़े हैं।
ऐसे फंसाते थे लोगों को
आरोपी लोगों को ऑनलाइन निवेश पर भारी रिटर्न का लालच देते थे। इसके लिए फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म तैयार किए गए थे, जहां निवेशकों को उनके पैसे पर बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता था।
शुरुआत में सब कुछ असली लगता था। मुनाफा बढ़ता दिखाई देता था, जिससे लोग और अधिक पैसा निवेश कर देते थे। लेकिन जैसे ही कोई निवेशक अपनी रकम निकालने की कोशिश करता, उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता और पूरा पैसा गायब हो जाता।
देशभर में फैला था नेटवर्क
पुलिस जांच में अब तक इस गिरोह से जुड़ी 15 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। अधिकारियों को आशंका है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, ठगी के और मामले सामने आ सकते हैं।
क्राइम ब्रांच अब आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और उनके अन्य साथियों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
