कटलरी का सामान खरीदने के नाम पर गुरुग्राम में हुई कई लाखों की साइबर ठगी की जांच में पुलिस ने ऐसा सुराग पकड़ा, जिसने साइबर फ्रॉड के पूरे नेटवर्क की एक अहम कड़ी सामने ला दी। ठगी में इस्तेमाल किए गए कॉलिंग और WhatsApp नंबर की SIM तक पहुंचते-पहुंचते पुलिस मथुरा पहुंची, जहां से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई थाना साइबर क्राइम ईस्ट, गुरुग्राम की पुलिस टीम ने की।

कितने की हुई ठगी ?
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 12 अगस्त 2026 को थाना साइबर क्राइम ईस्ट में शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि कटलरी का सामान खरीदने के नाम पर उसके साथ कुल ₹2,20,150 की साइबर ठगी की गई। प्राथमिक जांच में मामला BNS की धारा 318(4) के तहत पाया गया, जिसके बाद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
एक SIM ने पुलिस को पहुंचाया आरोपियों तक
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार बनाया। इसी जांच में ठगी के दौरान इस्तेमाल किए गए कॉलिंग/WhatsApp नंबर के SIM कार्ड की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, इस SIM को पोर्ट कराने के नाम पर कथित तौर पर फर्जी तरीके से जारी किया गया था। जांच की कड़ी आगे बढ़ी तो पुलिस मथुरा के दो आरोपियों तक पहुंची।
₹1,000 में खरीदी SIM, कितने में आगे बेच दी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी राहुल सिंह POS SIM Provider के तौर पर काम करता था। पुलिस के अनुसार, राहुल सिंह ने ठगी में इस्तेमाल की गई SIM को सहआरोपी प्रेम कुमार उर्फ नागेश को ₹1,000 में बेचा था। इसके बाद प्रेम कुमार उर्फ नागेश ने पूछताछ में बताया कि उसने यही SIM साइबर ठगी करने वाले अन्य आरोपियों को ₹1,500 में बेच दी थी। यानी एक SIM कार्ड पहले ₹1,000 में बिका और फिर ₹1,500 में आगे पहुंचा। इसी SIM की जांच करते हुए पुलिस साइबर ठगी के नेटवर्क की एक अहम कड़ी तक पहुंची।
कहाँ से पकड़े गए आरोपी
पुलिस ने मामले में राहुल सिंह पुत्र शिवराम सिंह, निवासी गांव बरसो, जिला भरतपुर, राजस्थान, हाल निवासी मासूम नगर, थाना हाईवे, मथुरा और प्रेम कुमार उर्फ नागेश पुत्र स्वर्गीय राजेश कुमार, निवासी गांव दतिया, थाना हाईवे, मथुरा को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को 30 सितंबर 2026 को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अभी खत्म नहीं हुई जांच
पुलिस के अनुसार, मामले में तकनीकी जांच अभी जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी में इस्तेमाल SIM और मोबाइल फोन के जरिए जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका थी और साइबर फ्रॉड का नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ है। इस मामले में आगे की जांच से साइबर ठगी के पीछे मौजूद अन्य आरोपियों और उनकी भूमिका को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
