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7 दिन से बंद सिटी बसों पर बड़ा अपडेट!

गुरुग्राम और फरीदाबाद में सिटी बसों से सफर करने वाले हजारों यात्रियों का इंतजार अब खत्म हो सकता है। पिछले कई दिनों से सड़कों से गायब बसें शुक्रवार सुबह से दोबारा चलने की उम्मीद है। लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि करीब 15 करोड़ रुपये के विवाद के बीच बस संचालन फिर शुरू करने पर सहमति बन गई?

दरअसल, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सिटी बसों का संचालन करने वाली कंपनी टीसीआरपीएल (TCRPL) और गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड (GMCBL) के अधिकारियों के बीच गुरुवार को बैठक हुई। इस बैठक में वित्तीय विवाद पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बसों का संचालन दोबारा शुरू करने पर सहमति बन गई।

15 करोड़ के विवाद पर हुई बातचीत
गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे सेक्टर-10 स्थित बस डिपो परिसर में GMCBL के सीईओ विश्वजीत चौधरी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें बस संचालन करने वाली कंपनी के निदेशक, महाप्रबंधक और अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में बकाया भुगतान को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, GMCBL की ओर से कंपनी की बकाया राशि में से कुछ रकम का भुगतान करने पर सहमति बनी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किन शर्तों पर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। गुरुवार शाम तक संबंधित कंपनी के खाते में भुगतान जमा होने की जानकारी भी नहीं मिली थी।

7 अक्टूबर से बंद थीं 100 सिटी बसें
करीब 15 करोड़ रुपये के वित्तीय विवाद के कारण 7 अक्टूबर से गुरुग्राम और फरीदाबाद में सिटी बसों का संचालन बंद था। दोनों शहरों में इस कंपनी की 50-50 बसें चलती थीं। यानी कुल 100 बसें सड़कों से हट गई थीं। बस सेवा बंद होने का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ा। इन बसों में हर दिन करीब 15 से 20 हजार लोग यात्रा करते थे। बसें बंद होने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा था।

यात्रियों को कब से मिलेगी राहत?
गुरुवार की बैठक में संचालन दोबारा शुरू करने पर सहमति बनने के बाद शुक्रवार सुबह से बसें चलने की उम्मीद है। हालांकि, बसों के वास्तव में सड़कों पर उतरने और संचालन की पूरी बहाली को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अगर तय योजना के मुताबिक बस सेवा शुरू होती है, तो गुरुग्राम और फरीदाबाद के हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बकाया भुगतान और बाकी शर्तों पर सहमति के बाद सिटी बसें कितनी जल्दी दोबारा सड़कों पर दौड़ती हैं।

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