गुरुग्राम में हर महीने होने वाली जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों के बावजूद दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं देखा जा रहा है। इन बैठकों में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारी भी शामिल होते हैं।

जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में पिछले तीन वर्षों से लगातार इस एक्सप्रेसवे को सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
तीन साल से निर्देश, लेकिन नतीजा शून्य
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के गुरुग्राम हिस्से में सुधार के लिए अब तक कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन:
- टूटी हुई रेलिंग की मरम्मत अधूरी
- अवैध कट अब भी मौजूद
- सड़क पर गड्ढों की समस्या बरकरार
- सर्विस लेन की हालत खराब
- स्ट्रीट लाइटों का बड़ा हिस्सा बंद
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुधार के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई हो रही है, जबकि वास्तविक स्थिति में कोई बदलाव नहीं दिखता।
सुरक्षा पर लगातार खतरा
धौलाकुआं से लेकर खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक कई स्थानों पर एक्सप्रेसवे की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। खासकर रात के समय बंद स्ट्रीट लाइटें और टूटे हुए सुरक्षा बैरियर दुर्घटनाओं के खतरे को बढ़ा रहे हैं।
लोगों में बढ़ता आक्रोश
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की तरफ से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि बैठकें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं।
टोल वसूली पर भी सवाल
खेड़कीदौला टोल प्लाजा से हर साल लगभग 200 करोड़ रुपये की वसूली होने के बावजूद सड़क रखरखाव और सुरक्षा सुधार पर अपेक्षित काम नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष
जिला उपायुक्त ने कहा है कि एक्सप्रेसवे की मरम्मत और सुरक्षा सुधार के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रगति की समीक्षा आगामी बैठक में की जाएगी और एक्सप्रेसवे सुरक्षा को लेकर अलग से विशेष बैठक भी बुलाई जाएगी।
