गुरुग्राम: साइबर ठगी के एक बड़े मामले की जांच करते-करते गुरुग्राम पुलिस ऐसी कड़ी तक पहुंची, जिसने जांच टीम को भी चौंका दिया। एक व्यक्ति से 3 करोड़ 26 लाख 40 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई और ठगी की रकम का एक हिस्सा जिस बैंक खाते में पहुंचा, उसका कनेक्शन जयपुर की एक चाय की दुकान से निकला।

पुलिस ने इस मामले में 32 साल के मालीराम मीणा को जयपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी सिर्फ 10वीं पास है और जयपुर में चाय की दुकान चलाता है।
लेकिन कहानी में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक चाय दुकानदार का बैंक खाता करोड़ों की साइबर ठगी से कैसे जुड़ गया?
24 लाख रुपये ने खोली पहली कड़ी
पीड़ित की शिकायत के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस आयुक्त साइबर क्राइम गुरुग्राम के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई।
जांच टीम ने जब ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन को खंगालना शुरू किया तो 24 लाख रुपये शाइन एंटरप्राइज नाम की फर्म के बैंक खाते में पहुंचने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद पुलिस ने इस खाते से हुए आगे के लेन-देन की भी जांच शुरू की।
खाते से आगे गए 6.60 लाख रुपये
पुलिस के मुताबिक, शाइन एंटरप्राइज के खाते में आए 24 लाख रुपये में से 6 लाख 60 हजार 2 रुपये आगे मुकेश चाय वाला प्राइवेट लिमिटेड के एक्सिस बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। यहीं से पुलिस ने बैंक खाते के मालिक और फर्म से जुड़ी जानकारी खंगालनी शुरू की।
जांच की कड़ी जयपुर पहुंची और सामने आया मालीराम मीणा का नाम।
चाय की दुकान चलाता था आरोपी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि मालीराम मीणा ने अपनी चाय की दुकान के नाम पर शाइन एंटरप्राइज फर्म बनाई थी।
यानी एक चाय की दुकान से जुड़ी फर्म का बैंक खाता बाद में साइबर ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन में इस्तेमाल हुआ।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने ज्यादा पैसे कमाने के लालच में अपना बैंक खाता 1 लाख 40 हजार रुपये में किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया था।
यहीं से पूरा मामला और गंभीर हो गया।
1.40 लाख के लालच में बैंक खाता बेच दिया
पुलिस का कहना है कि मालीराम ने अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को 1.40 लाख रुपये में दे दिया था। इसके बाद इसी खाते का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जिस व्यक्ति को खाता बेचा गया था, वह कौन है और उसका साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क से क्या कनेक्शन है।
यही कड़ी इस मामले की जांच में सबसे अहम मानी जा रही है।
11 अगस्त को जयपुर से गिरफ्तारी
तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच के आधार पर पुलिस ने मालीराम मीणा को चिन्हित किया। इसके बाद पुलिस टीम ने 11 अगस्त को जयपुर से उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
अब पुलिस के सामने कई बड़े सवाल
रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से कई अहम बिंदुओं पर पूछताछ कर रही है। सबसे बड़ा सवाल है कि बैंक खाता आखिर किसे बेचा गया था?
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि:
- खाते के जरिए कितने और ट्रांजेक्शन हुए?
- ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची?
- खाते का इस्तेमाल करने वाले साइबर अपराधी कौन हैं?
- 3.26 करोड़ की ठगी में इस नेटवर्क की भूमिका क्या है?
- ठगी की रकम में से कितनी राशि बरामद की जा सकती है?
सिर्फ खाता बेचने से खत्म नहीं होगी कहानी
पुलिस की जांच अब मालीराम मीणा की गिरफ्तारी से आगे बढ़ चुकी है। बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर अपराधियों की पूरी चेन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल एक बात साफ है कि 1.40 लाख रुपये के लालच में बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को देना आरोपी को भारी पड़ गया।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस खाते के पीछे छिपे असली साइबर अपराधी कौन हैं और 3 करोड़ 26 लाख 40 हजार रुपये की इस बड़ी ठगी का पूरा नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है।
