द्वारका एक्सप्रेसवे से दिल्ली आने-जाने वाले हैं तो आपके लिए बड़ी खबर है। जिस बिजवासन टोल प्लाजा पर अक्सर गाड़ियों की लंबी लाइन लग जाती है और टोल देने में समय खराब होता है, वहां अब ऐसा नजारा जल्द बदल सकता है।
बिजवासन टोल प्लाजा पर अब Multi Lane Free Flow (MLFF) सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस सिस्टम के बाद वाहनों को टोल बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। यानी गाड़ी चलते हुए ही टोल प्रक्रिया पूरी कर सकेगी और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतार कम होने की उम्मीद है।

कब तक तैयार होगा सिस्टम
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को बिजवासन टोल प्लाजा पर MLFF सिस्टम विकसित करने की अनुमति दे दी है। NHAI ने MCD को अक्टूबर के अंत तक यह व्यवस्था तैयार करने को कहा है। बिजवासन टोल प्लाजा पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय में यहां वाहनों की रफ्तार कम हो जाती है और कई बार टोल बूथ तक लंबी लाइन लग जाती है। इसका असर पीछे तक द्वारका एक्सप्रेसवे के ट्रैफिक पर पड़ता है।
टोल देने में 20-25 मिनट तक हो जाते हैं खराब
द्वारका एक्सप्रेसवे से रोजाना सफर करने वाले कुछ वाहन चालकों के मुताबिक, टोल बूथ पर लाइन में लगने के कारण कई बार 20 से 25 मिनट तक का समय खराब हो जाता है। यही वजह है कि तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे पर टोल बैरियर को हटाकर फ्री-फ्लो सिस्टम लाने की जरूरत महसूस की जा रही है। एक्सप्रेसवे का मकसद ही तेज और बिना रुकावट ट्रैफिक को बनाए रखना है, लेकिन टोल बूथ पर रुकने से यह पूरा सिस्टम प्रभावित होता है।
सरहौल के बाद अब बिजवासन टोल की बारी
बिजवासन से पहले सरहौल बॉर्डर स्थित MCD टोल प्लाजा पर भी MLFF सिस्टम विकसित करने की अनुमति दी जा चुकी है। NHAI के परियोजना निदेशक भवनेश कुमार के मुताबिक, MCD ने बिजवासन टोल प्लाजा पर भी अक्टूबर के अंत तक MLFF सिस्टम विकसित करने का भरोसा दिया है।
क्या होगा फायदा?
MLFF सिस्टम लागू होने के बाद टोल बैरियर पर वाहनों को रोकने की जरूरत नहीं होगी। इससे टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार कम करने और ट्रैफिक की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यानी आने वाले समय में द्वारका एक्सप्रेसवे से दिल्ली आने-जाने वाले वाहन चालकों को टोल पर रुकने और लंबी लाइन में फंसने से राहत मिलने की उम्मीद है।
अब देखना होगा कि बिजवासन टोल पर यह फ्री-फ्लो सिस्टम अक्टूबर के अंत तक कितना तैयार हो पाता है और इसके लागू होने के बाद ट्रैफिक पर कितना असर पड़ता है।
