गुरुग्राम में 40 घंटे तक बिजली गुल, पानी के लिए भी तरसे लोग! हड़ताल के बीच प्रशासन की तैयारी पर उठे सवाल

रातभर अंधेरा, घरों में पानी की किल्लत और सुबह बच्चों को स्कूल भेजने तक में परेशानी। साइबर सिटी गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी। हालात ऐसे बिगड़े कि लोगों ने दौलताबाद फ्लाईओवर पर जाम लगा दिया। इसके बावजूद बिजली संकट से लोगों को तुरंत राहत नहीं मिल सकी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हड़ताल पहले से घोषित थी, तो प्रशासन ने बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए क्या इंतजाम किए थे?

40 घंटे तक बिजली संकट, कई इलाके प्रभावित
बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर गुरुग्राम के कई इलाकों में देखने को मिला। बुधवार रात करीब 10 बजे के बाद बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई और कई क्षेत्रों में करीब 40 घंटे तक लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।

भीम नगर, दौलताबाद, बसई, गढ़ी हरसरू, दयानंद कॉलोनी, सेक्टर-9, सेक्टर-10, हरि नगर, आईडीसी, अशोक विहार, शिवाजी नगर, धनवापुर, सूर्या विहार, न्यू पालम विहार, खांडसा, न्यू कॉलोनी, गुड़गांव गांव, बजघेड़ा, भीमगढ़ खेड़ी, राजेंद्र पार्क और शीतला कॉलोनी सहित कई इलाकों में बिजली संकट का असर पड़ा। पटौदी, फर्रुखनगर और जमालपुर क्षेत्र में भी लोगों को परेशानी हुई।

बिजली गई तो पानी का संकट भी खड़ा हुआ
बिजली गुल होने का असर सिर्फ रोशनी तक सीमित नहीं रहा। घरों में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। लोगों को पीने के पानी और रोजमर्रा के कामों के लिए परेशानी उठानी पड़ी। सुबह बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करने से लेकर लोगों के काम पर जाने तक, हर काम प्रभावित हुआ। पानी की कमी के कारण कुछ बच्चे स्कूल भी नहीं जा सके। रातभर बिजली का इंतजार करने वाले लोगों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर दिखाई दिया।

दौलताबाद फ्लाईओवर पर लोगों ने लगाया जाम
बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने से परेशान लोगों ने दौलताबाद फ्लाईओवर पर जाम लगा दिया। लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि बिजली संकट के बीच उन्हें राहत देने के लिए प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आए।

हड़ताल की जानकारी पहले से होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? शिकायतों का समय पर समाधान क्यों नहीं हुआ? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब प्रशासन और बिजली निगम से मांगा जा रहा है।

उद्योगों में भी ठप हुआ कामकाज
बिजली संकट का असर गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ा। सेक्टर-37, बसई, कादीपुर, उद्योग विहार और बेगमपुर खटौला समेत कई क्षेत्रों में हजारों औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन प्रभावित हुआ। इससे उद्योगों को आर्थिक नुकसान हुआ और श्रमिकों का काम भी प्रभावित रहा।

पीएफटीआई के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि हड़ताल को देखते हुए प्रशासन को उद्यमियों के साथ पहले ही बातचीत करनी चाहिए थी। यदि बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखना संभव नहीं था, तो उद्योगों को समय रहते स्थिति की जानकारी दी जानी चाहिए थी, ताकि वे अपने कामकाज की योजना बना सकें। उनके मुताबिक, बिजली संकट के कारण पूरे दिन कर्मचारियों और श्रमिकों का काम प्रभावित रहा। उन्होंने कहा कि बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

प्रशासन की तैयारी पर उठ रहे सवाल
गुरुग्राम जैसे बड़े औद्योगिक शहर में बिजली संकट ने आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक को प्रभावित किया। घरों में पानी की परेशानी हुई, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप रहा। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पहले से घोषित थी, तो प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की? क्या शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए पर्याप्त इंतजाम थे? और आगे ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

More From Author

गुरुग्राम वालों का इंतजार होगा खत्म? मेट्रो को लेकर आई बड़ी खबर!

मच्छरों से परेशान हैं गुरुग्राम के लोग? मेयर ने शुरू कराई ये मुहिम!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *