गुरुग्राम में पानी का हिसाब होगा स्मार्ट! क्या आपके सेक्टर की भी आएगी बारी?

गुरुग्राम में अब पानी के इस्तेमाल पर भी तकनीक की नजर होगी! घरों में लगने वाले पानी के मीटर बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। लेकिन क्या इन नए मीटरों से पानी की खपत का हिसाब रखना आसान होगा? क्या इससे जल प्रबंधन में सुधार आएगा? इसकी शुरुआत शहर के सेक्टर-45 से हो चुकी है।

दरअसल, नगर निगम गुरुग्राम ने जलापूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए सेक्टर-45 में स्मार्ट वाटर मीटर लगाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस पहल के तहत यहां अल्ट्रासोनिक स्मार्ट वाटर मीटर स्थापित किए गए हैं। इसका मकसद पानी की खपत को मापने की व्यवस्था को बेहतर बनाना और आधुनिक तकनीक के जरिए जल प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करना है।

पुराने मीटरों की जगह आएगी आधुनिक तकनीक
नगर निगम की इस पहल में अल्ट्रासोनिक तकनीक वाले स्मार्ट वाटर मीटर लगाए जा रहे हैं। परियोजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मीटर उपलब्ध कराने और उन्हें स्थापित करने के साथ हैंडहेल्ड यूनिट के जरिए डेटा जुटाने का काम भी शामिल है। इस तकनीक के जरिए पानी की खपत का मापन अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। हालांकि, इस पायलट प्रोजेक्ट से पानी के बिल, दरों या भुगतान व्यवस्था में क्या बदलाव होंगे, इसे लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

कब तक पूरा होगा काम?
नगर निगम की ओर से जारी कार्यादेश के अनुसार, स्मार्ट वाटर मीटर के निर्माण और स्थापना की निर्धारित अवधि 15 अक्टूबर 2026 से 14 दिसंबर 2026 तक है। फिलहाल सेक्टर-45 में पायलट आधार पर काम शुरू किया गया है। इस दौरान मीटरों की स्थापना, काम की गुणवत्ता और तय तकनीकी शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाना है। शुरुआती चरण के अनुभवों के आधार पर आगे की प्रक्रिया को निर्धारित शर्तों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या गुरुग्राम में सुधरेगी पानी की व्यवस्था?
गुरुग्राम जैसे तेजी से बढ़ते शहर में पानी की मांग और उसकी खपत का सही हिसाब रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में स्मार्ट वाटर मीटर की पहल जल प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। निगमायुक्त प्रदीप दहिया के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आधुनिक मीटरिंग व्यवस्था के माध्यम से पानी की खपत के मापन को अधिक व्यवस्थित बनाना और नागरिक सेवाओं में तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देना है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सेक्टर-45 में शुरू हुआ यह प्रयोग कितना सफल रहता है और क्या आने वाले समय में गुरुग्राम के दूसरे सेक्टरों में भी स्मार्ट वाटर मीटर लगाए जाएंगे? फिलहाल, इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों पर सबकी नजर रहेगी।

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